बेंगलुरु , सितंबर 12 -- केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्यूलर) नेता एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक की विपक्षी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पीछे छोड़ते हुए सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाने और 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले खुद को एक अहम राजनीतिक चुनौती देने वाले नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं।
विधानसभा में बतौर विपक्ष भाजपा की मौजूदगी अधिक होने के बावजूद श्री कुमारस्वामी ने हाल के महीनों में बार-बार कांग्रेस सरकार के खिलाफ पहल की है। उन्होंने ऐसे मुद्दे उठाए और दस्तावेज पेश किए हैं, जिनसे सत्ताधारी पार्टी को जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनके आक्रामक रुख में एचएमटी जमीन विवाद और नाइस परियोजना से लेकर केपीएससी भर्ती में गड़बड़ियों तक के मामले शामिल रहे हैं। इससे जेडी (एस) नेता को विधानसभा में अपनी पार्टी की संख्या के मुकाबले कहीं अधिक बड़ी राजनीतिक पहचान मिली है।
मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के साथ श्री कुमारस्वामी की सीधी टक्कर ने राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है, खासकर बेंगलुरु और पुराने मैसूर इलाके में, जिसे पारंपरिक रूप से जेडी (एस) का गढ़ माना जाता है। मुख्यमंत्री पुराने मैसूर इलाके में पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करके कांग्रेस का आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुमारस्वामी जेडी (एस) की पारंपरिक राजनीतिक जगह को बचाने की कोशिशें तेज कर रहे हैं।
कर्नाटक की राजनीति में लौटने के बारे में जेडी (एस) नेता के लगातार बयानों ने 2028 की चुनावी लड़ाई में उनकी बड़ी भूमिका के बारे में अटकलों को भी हवा दी है।
श्री कुमारस्वामी ने संकेत दिया है कि सही समय आने पर वे राज्य की राजनीति में लौटेंगे और कहा है कि वे कर्नाटक में कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं। इससे भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन के भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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