विजयपुरा , मार्च 18 -- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक सरकार से सरकारी पदों की रिक्तियों को भरने की मांग को लेकर बीजापुर जिले के विजयपुरा में बुधवार को प्रदर्शन किया और राज्य में छात्रों की शिक्षा की गिरती स्थिति पर ध्यान देने का आग्रह किया।
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर कार्यालय में प्रार्थना पत्र सौंपने का प्रयास किया, लेकिन शुरू में उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। बाद में वहां पहुंचे अधिकारियों ने उनका प्रार्थना पत्र स्वीकार किया।
एबीवीपी की केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य सचिन कुलागेरी ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले पांच-छह वर्षों से कर्नाटक में छात्रों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उदासीन है, उसके पास कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है और वह छात्रों की चिंताओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने में विफल रही है।
श्री कुलागेरी ने रेखांकित किया कि यद्यपि सरकार ने सत्ता में आने पर रिक्त सरकारी पदों पर भर्ती का वादा किया था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में कोई भर्ती नहीं की गई है। वर्तमान में 43 विभागों में 2,84,881 पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आगे कहा कि भर्ती होने की उम्मीद में लाखों अभ्यर्थियों ने तैयारी में अपना समय और पैसा लगाया है, जिनमें से कई अब पात्रता की आयु सीमा पार कर चुके हैं।
एबीवीपी के जिला संयोजक संदीप अरालगुंडी ने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों में 79,694 पद खाली हैं, जबकि उच्च शिक्षा क्षेत्र में 13,599 पद रिक्त हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और कक्षाओं के संचालन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
एबीवीपी के विधि छात्र नेता मंजूनाथ हल्ली ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालय, जिन्हें कभी उच्च शिक्षा का प्रतिष्ठित केंद्र माना जाता था, अब उपेक्षित हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार अनुदान प्रदान नहीं कर रही है और विश्वविद्यालय मुख्य रूप से छात्रों की फीस और विभिन्न शुल्कों के भरोसे चल रहे हैं।
श्री हल्ली ने चेतावनी दी कि पिछली सरकार ने नौ विश्वविद्यालय स्थापित किये थे, जो अब बंद होने के कगार पर हैं और भर्ती में देरी से परीक्षा परिणामों तथा अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जो छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू की थीं, वे प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच रही हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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