बेंगलुरु , अक्टूबर 19 -- कर्नाटक विधान परिषद के उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव कांग्रेस के लिए भाजपा को चुनौती देने की उसकी क्षमता का आंकलन करेगा।
यह एक ऐसी सीट है जिस पर लंबे समय से दोनों पार्टियां मुकाबला करती आ रही हैं। इस बार के चुनावी मुकाबले में मौजूदा एमएलसी शशिल नमोशी का सामना कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूरा से हो रहा है।
मतदान 23 अक्टूबर को होगा और इसके मद्देनजर यह मुकाबला और भी महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस राज्य सरकार में अपनी स्थिति और क्षेत्र में विधानसभा स्तर पर अपनी ताकत का इस्तेमाल कर भाजपा के खिलाफ चुनावी बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रही है।
श्री मत्तूरा के लिए यह चुनाव श्री नमोशी से हिसाब बराबर करने का एक मौका है। उन्होंने 2014 में श्री नमोशी को हराया था लेकिन 2020 के चुनाव में उन्हें हराने में नाकाम रहे थे। श्री नमोशी चार बार विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं और कलबुर्गी में 'हैदराबाद एजुकेशन सोसाइटी' के अध्यक्ष हैं, इस निर्वाचन क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
इस नतीजे पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी जिससे यह संकेत मिल सकता है कि क्या कांग्रेस इस क्षेत्र में शिक्षकों के बीच भाजपा के मजबूत जनाधार में सेंध लगा पाती है या नहीं।
कांग्रेस अपने चुनाव प्रचार को इस निर्वाचन क्षेत्र में अपनी राजनीतिक मौजूदगी के इर्द-गिर्द केंद्रित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के आकलन के अनुसार, इस क्षेत्र में 27 विधानसभा क्षेत्र आते हैं जहां कांग्रेस के विधायक हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कलबुर्गी से जुड़ाव भी इस मुकाबले को राजनीतिक रूप से अहम बनाता है हालांकि यह देखना अभी बाकी है कि इन बातों का शिक्षकों के बीच मिलने वाले वोटों पर कितना असर पड़ता है।
केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस उन सभी चार स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल करेगी जहां चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं और भरोसा जताया कि मतदाता सोच-समझकर अपना फैसला लेंगे। इस बीच, भाजपा श्री नमोशी के ज़रिए इस सीट को अपने पास बनाए रखने की कोशिश कर रही है; लगातार चुनाव जीतने के कारण उस क्षेत्र में उनकी एक मज़बूत पकड़ है।
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