बेंगलुरु , अगस्त 16 -- कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने रविवार को चामराजनगर जिले के हनूर तालुक में वन विभाग के कर्मचारियों की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत के मामले में कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला और घटना के बारे में सरकारी बयान पर सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की।

श्री अशोक ने कहा कि वन विभाग के बयान और पीड़ितों के परिवारों व स्थानीय लोगों की बातों में भारी अंतर है, जिससे इस बात पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है कि क्या गोलीबारी सही थी। वन विभाग का दावा है कि ये चारों लोग जंगली जानवरों के शिकार और उनके मांस की बिक्री में शामिल थे, जबकि परिवारों और स्थानीय लोगों ने इस घटना को फर्जी मुठभेड़ बताया है।

उन्होंने कहा, "दो बिल्कुल अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। सच का पता चलना चाहिए।" उन्होंने कहा कि जब गोली चलाना ज़रूरी भी हो, तो कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वे पहले चेतावनी दें और जहां संभव हो, पैरों पर निशाना साधें। हालांकि, परिवारों का आरोप है कि मृतकों को सीने में गोली मारी गयी थी। श्री अशोक ने शवों को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए और कहा कि पुलिस द्वारा घटनास्थल का मुआयना करने से पहले ही उन्हें कथित तौर पर मैसूर ले जाया गया था। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच शक और बढ़ गया है।

भाजपा नेता ने कहा कि वन विभाग ने अभी तक कथित तौर पर ज़ब्त किए गये हथियारों, जानवरों के मांस की मात्रा या मारे गए लोगों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में जनता के सामने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। उन्होंने कहा, "अगर वे शिकारी थे, तो उनका पुराना रिकॉर्ड और उनके ख़िलाफ़ सबूत लोगों के सामने रखे जाने चाहिए। अगर नहीं, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि उन्हें गोली क्यों मारी गयी।"श्री अशोक ने वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मौतों और बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद मंत्री का घटना स्थल पर न पहुँचना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, "उनके विभाग से जुड़ी एक घटना में तीन लोगों की मौत हो गयी है, फिर भी वन मंत्री ने घटना स्थल का दौरा नहीं किया है।" उन्होंने कहा कि श्री रेड्डी को तुरंत हनूर जाना चाहिए था, वन अधिकारियों के साथ बैठक करनी चाहिए थी, गोलीबारी की परिस्थितियों का जायज़ा लेना चाहिए था और विरोध कर रहे निवासियों तथा परिवारों से सीधे बात करनी चाहिए थी।

श्री अशोक ने कहा कि मंत्री की ज़िम्मेदारी है कि वे लोगों को घटना के बारे में बताएँ और उनका भरोसा बहाल करें, खासकर ऐसे समय में जब अलग-अलग बयानों की वजह से लोगों में काफ़ी शक पैदा हो गया है। उन्होंने कहा, "सिर्फ़ संबंधित मंत्री के पास ही अपने विभाग के कामकाज की समीक्षा करने का अधिकार है। कोई दूसरा मंत्री वहाँ जाकर विभागीय समीक्षा नहीं कर सकता। श्री रेड्डी को तुरंत घटना स्थल पर जाना चाहिए और सच लोगों के सामने रखना चाहिए।"मंत्री पर निशाना साधते हुए श्री अशोक ने कहा कि विभाग बदलने के बाद श्री रेड्डी को शायद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि वे इसलिए नहीं गए क्योंकि वे नाराज़ हैं या इसलिए कि उन्हें यह विभाग पसंद नहीं है। लेकिन एक मंत्री के तौर पर, जब उनके विभाग से जुड़ी घटना में तीन लोगों की मौत हो गई है, तो उन्हें तुरंत जवाब देना चाहिए।"श्री अशोका ने कहा कि श्री रेड्डी को अभियान में शामिल वन विभाग के कर्मचारियों से मिलना चाहिए, गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच करनी चाहिए और कोई भी नतीजा निकालने से पहले परिवारों और प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से मामले की जांच कराने के सरकारी फैसले को खारिज कर दिया और तर्क दिया कि अपने ही विभाग की जांच करने वाले अधिकारी जनता का भरोसा नहीं जीत पाएंगे।

उन्होंने कहा, "अधिकारियों द्वारा अधिकारियों की जांच से सच सामने नहीं आएगा। यह न्यायिक जांच होनी चाहिए।" उन्होंने मांग की कि गोलीबारी के लिए जिम्मेदार लोगों को जांच पूरी होने तक ड्यूटी से दूर रखा जाए।

श्री अशोका ने सवाल उठाया कि क्या गोलीबारी जरूरी थी, जबकि चार लोगों में से एक कथित तौर पर बच गया था, और पूछा कि मारे गए तीनों लोगों के खिलाफ घातक हथियारों का इस्तेमाल क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा न्यायिक जांच की मांग पर मजबूती से कायम है और सच्चाई का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से तुरंत न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया और कहा कि केवल ऐसी जांच ही विरोधाभासों को सुलझा सकती है और सच्चाई सामने ला सकती है।

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