बेंगलुरु , जुलाई 02 -- कर्नाटक के सिदलाघट्टा के किसान प्रस्तावित 'सर एमवी डीप टेक पार्क' का विरोध कर रहे हैं जिससे ज़मीन अधिग्रहण को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
किसानों का कहना है कि इस बड़े औद्योगिक संयत्रों से हज़ारों एकड़ उपजाऊ खेती की ज़मीन खत्म हो सकती है और किसान परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
कर्नाटक सरकार का 13 गांवों में फैली 2,800 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर 'डीप टेक पार्क' बनाने का प्रस्ताव स्थानीय लोगों में चिंता पैदा कर रहा है। उन्हें डर है कि उन्हें अपनी ज़मीन से बेदखल होना पड़ सकता है और खेती की वह ज़मीन हमेशा के लिए खत्म हो सकती है, जिस पर पीढ़ियों से उनका गुज़ारा चल रहा है।
सिदलाघट्टा बागवानी का एक अहम इलाका है, जहाँ से बेंगलुरु और आस-पास के बाज़ारों में अंगूर, आम और कई तरह की दूसरी कृषि उपज भेजी जाती हैं। किसानों का तर्क है कि उपजाऊ खेती की ज़मीन को औद्योगिक क्षेत्र में बदलने से इस इलाके की खेती पर आधारित अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल जायेगी।
किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी कमाई और गुज़ारे का मुख्य ज़रिया है। उनका तर्क है कि आर्थिक मुआवज़ा उपजाऊ ज़मीन की सही भरपाई नहीं कर सकता और न ही लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दे सकता है, खासकर उन युवा पीढ़ियों के लिए जो खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं। मुआवज़े को लेकर चिंताओं के अलावा, ग्रामीणों ने पुनर्वास, फिर से बसाने और भविष्य में रोज़गार के मौकों के बारे में साफ़ जानकारी की मांग की है। उनका कहना है कि ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता ने प्रभावित गांवों में डर और चिंता बढ़ा दी है।
राज्य सरकार ने 'सर एमवी डीप टेक पार्क' को एक प्रमुख औद्योगिक पहल के तौर पर पेश किया है। इसका मकसद डीप टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना है, साथ ही कर्नाटक को 'इनोवेशन' के एक बड़े केंद्र के तौर पर और मज़बूत बनाना है।
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