मंगलुरु , अगस्त 02 -- कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में एक जंगली हाथी ने 55 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर को कुचल दिया, जिसके कारण उसकी मौत हो गयी। इस घटना ने बेल्थंगडी तालुक के जंगलों से सटे गांवों में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इदमलु गांव के रहने वाले बालकृष्ण गौड़ा पर शनिवार शाम काम से घर लौटते समय नेल्याडी पुलिस स्टेशन इलाके के रेख्या गांव में मुचिराडका के पास हमला हुआ। जब गौड़ा घर नहीं पहुंचे, तो उनके परिवार वालों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। जंगल के रास्ते में उनका रेनकोट और हाथी के ताजे पैरों के निशान मिलने के बाद तलाशी अभियान ने एक दुखद मोड़ ले लिया, जिससे हाथी के हमले की आशंका बढ़ गयी।

स्थानीय लोगों, वन विभाग के कर्मचारियों और अरासिनामाक्की-शिशिला शौर्य आपदा प्रबंधन इकाई के सदस्यों की रात भर चली तलाशी रविवार सुबह खत्म हुई, जब गौड़ा का शव पास की एक खाई से बरामद किया गया। स्थानीय खबरों के मुताबिक, आशंका है कि यह हमला एक अकेले जंगली हाथी ने किया है, जिसे हाल के दिनों में रेख्या-मुचिराडका वन क्षेत्र में कई बार देखा गया है, जिससे आसपास के गांवों के लोगों में डर फैल गया हैवन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों (सहायक वन संरक्षक सुब्बैया नाइक और उप्पिनंगडी रेंज वन अधिकारी एचपी राघवेंद्र शामिल थे) ने धर्मस्थल पुलिस उप निरीक्षक समर्थ गनिगेरा के साथ घटनास्थल का दौरा किया और निरीक्षण किया।

इस घटना से ग्रामीणों में गुस्सा फैल गया। उन्होंने हाथी को पकड़ने या भगाने, जंगल में गश्त बढ़ाने और जान-माल के और नुकसान को रोकने के लिए एक असरदार पूर्व-चेतावनी प्रणाली लगाने जैसे तुरंत कदम उठाने की मांग की। निवासियों का आरोप है कि खेतों और गाँव के रास्तों पर हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण किसानों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए हालात असुरक्षित हो गए हैं।

इस ताज़ा मौत ने दक्षिण कन्नड़ में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को फिर से चर्चा में ला दिया है। यहाँ जंगल के घटते दायरे, मॉनसून में उगने वाली भरपूर वनस्पति और इंसानी गतिविधियों के बढ़ने की वजह से हाथी बार-बार खेतों और रिहायशी इलाकों में घुस रहे हैं।

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