बेंगलुरु , जुलाई 30 -- कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) की कृषि अधिकारी (एओ) और सहायक कृषि अधिकारी (एएओ) भर्ती परीक्षाएं ( जो नौ साल के अंतराल के बाद नौ अगस्त को होनी थीं) उनके टलने की संभावना है। राज्य भर में कृषि छात्र 945 सरकारी पदों के लिए योग्यता मानदंडों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

यह विरोध प्रदर्शन 15 जुलाई को बेंगलुरु में यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज के गांधी कृषि विज्ञान केंद्र (जीकेवीके) में शुरू हुआ था और अब कर्नाटक के सभी कृषि कॉलेजों में फैल गया है। छात्र मांग कर रहे हैं कि केवल उन्हीं स्नातकों को इन पदों के लिए मुकाबला करने की अनुमति दी जाये जिन्होंने इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) द्वारा तय कृषि पाठ्यक्रम पूरा किया हो।

प्रदर्शनकारी केईए की उस अधिसूचना का विरोध कर रहे हैं, जिसमें बीई और बी.टेक स्नातक को भी योग्य माना गया है। उनका तर्क है कि कृषि विभाग में तकनीकी पदों के लिए बिना विशेष कृषि शिक्षा वाले उम्मीदवारों की भर्ती नहीं की जानी चाहिए।

छात्र नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा निजी कॉलेजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि भर्ती के नियमों में की गयी ढील के खिलाफ है। उनका तर्क है कि कृषि स्नातक राष्ट्रीय स्तर पर तय पाठ्यक्रम के तहत विशेष विषयों की पढ़ाई में कई साल लगाते हैं, इसलिए उन्हें गैर-कृषि स्ट्रीम के उम्मीदवारों के साथ मुकाबला करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

इस विवाद ने भर्ती प्रक्रिया पर अनिश्चितता पैदा कर दी है और अब विरोध को और बढ़ने से रोकने के लिए परीक्षा को टालने की उम्मीद है।

छात्रों ने उन उम्मीदवारों को बाहर करने की मांग के अलावा, जिन्हें वे अयोग्य मानते हैं, एओ और एएओ पदों पर हर साल भर्ती, स्पोर्ट्स कोटा शुरू करने, बी.टेक स्नातक के लिए आरक्षण का हिस्सा कम करने और सिर्फ़ सरकारी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए लोगों को ही फ़ार्मास्युटिकल लाइसेंस देने की भी मांग की है। प्रदर्शन करने वाले कई छात्र, जिनमें से ज़्यादातर किसान परिवारों से हैं, का कहना है कि यह भर्ती सुरक्षित सरकारी नौकरी पाने के कुछेक रास्तों में से एक है। उन्हें डर है कि योग्यता के नये नियमों से, सालों की खास ट्रेनिंग के बावजूद, उनके चुने जाने की संभावना कम हो जाएगी। जीकेवीके के वाइस-चांसलर वी. सुरेश ने कहा कि इस मुद्दे पर 2021 से क एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के साथ बातचीत चल रही है और छात्रों ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि भर्ती नियमों में किसी भी बदलाव के लिए राज्य सरकार की औपचारिक मंज़ूरी की ज़रूरत होगी।मामला और आगे बढ़ने पर, प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 28 जुलाई को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाक़ात की और उनसे दखल देने की मांग की।

कर्नाटक सरकार अब तक छात्रों की मांगों पर चुप रही है और उसने आधिकारिक तौर पर यह घोषणा नहीं की है कि नौ अगस्त को होने वाली परीक्षाएं स्थगित की जाएंगी या नहीं।

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