बेंगलुरु , अक्टूबर 28 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को स्वीकार किया कि विधान परिषद चुनावों के नतीजे सत्तारूढ़ पार्टी की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे।

भारतीय जनता पार्टी-जनता दल सेक्युलर (भाजपा-जद(एस) गठबंधन के सभी चार सीटों पर कब्जा जमाने के बाद उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा करेगी और सुधारात्मक कदम उठायेगी।

कांग्रेस को कम से कम एक या दो सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन वह एक भी सीट हासिल करने में विफल रही। श्री शिवकुमार ने कहा कि पार्टी इस असफलता के कारणों की जांच करेगी और कमियों को दूर करेगी। उन्होंने कहा, "जनता ने हमें एक संदेश दिया है। हम उस संदेश का बहुत बारीकी से परीक्षण करेंगे और जो भी कमी रही है, उसे सुधारने पर काम करेंगे" उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी मतदाताओं के जनादेश का सम्मान करती है।

राज्य के 19 जिलों में फैले दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में राजग की इस क्लीन स्वीप ने प्रभावित क्षेत्रों में कांग्रेस नेतृत्व को अपनी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक प्रदर्शन का आकलन करने के लिए दबाव में ला दिया है। भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दल जद(एस) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर कब्जा जमाया।

बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जद(एस) उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने पांच बार के एमएलसी और कांग्रेस के दिग्गज नेता पुट्टन्ना को हराया। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार शशिल जी. नमोशी ने लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को 3,297 मतों से हराया। इसके अलावा, भाजपा उम्मीदवार एस.वी. संकनूर और के.एम. सुरेश ने दो स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। संकनूर ने कांग्रेस उम्मीदवार मोहन लिंबिकाई को हराकर लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए पश्चिम स्नातक सीट अपने पास रखी।

इन परिणामों को 2028 के विधानसभा चुनावों के राजनीतिक मूड का संकेतक बताने के विपक्ष के प्रयासों पर प्रतिक्रिया देते हुए, श्री शिवकुमार ने सवाल किया कि क्या चन्नपट्टन और शिग्गांव विधानसभा उपचुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन के समय भी यही पैमाना अपनाया गया था।

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