बेंगलुरु , अगस्त 8 -- कर्नाटक सरकार ने संदिग्ध अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए यहां 1,909 लोगों को हिरासत में लिया है।
यहां पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सिटी सब-डिवीजन के 29 स्थानों पर तड़के एक साथ छापेमारी की। उपायुक्त (डीसीपी) एम. नारायण के पर्यवेक्षण में 295 पुलिसकर्मियों वाली 23 विशेष टीमों को इस अभियान में लगाया गया था। पुलिस ने बताया कि सत्यापन के लिए 1,909 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से अब तक 15 लोगों के बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि हुई है। शेष 1,894 लोगों की राष्ट्रीयता और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई के दौरान संदिग्ध फर्जी भारतीय पहचान पत्र भी जांच के दायरे में आ गए हैं। पुलिस ने पश्चिम बंगाल और असम के पते वाले आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बरामद किए हैं। जांच अधिकारी इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या स्थानीय बिचौलियों ने संदिग्ध विदेशी नागरिकों को ये दस्तावेज हासिल करने में मदद की थी।
राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने बताया कि पिछले तीन महीनों में राज्य में लगभग 1,000 संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान की गई है। गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया को केवल एक बार की जाने वाली कार्रवाई नहीं माना जा सकता, बल्कि इस मुद्दे पर नजर रखने के लिए एक सतत तंत्र की आवश्यकता है।
उन्होंने केंद्र और कर्नाटक सरकार के बीच बेहतर समन्वय की मांग करते हुए कहा कि चूंकि राज्य की सीमा किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा से नहीं लगती, इसलिए यह देखना जरूरी है कि वे भारत में कहां से प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर वे कर्नाटक आ रहे हैं, तो वे देश में कैसे प्रवेश कर रहे हैं? क्या वे त्रिपुरा, असम या पश्चिम बंगाल के रास्ते आ रहे हैं? सीमा सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।"मंत्री ने कहा कि सरकार उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीयता और दस्तावेजों का सत्यापन करेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों को चेतावनी दी कि वे कानून हाथ में न लें और किसी पर केवल संदेह के आधार पर उसे निशाना बनाने, वीडियो बनाने या परेशान करने के बजाय अधिकारियों को सूचना दें।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित