बेंगलुरु , मई 10 -- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर का केआईएमएस अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद रविवार तड़के निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे।
अस्पताल सूत्रों ने पुष्टि करते हुए कहा कि श्री सुधाकर ने आज सुबह लगभग 3:15 बजे अंतिम सांस ली। गंभीर शल्यक्रिया के बाद की जटिलताओं के कारण उन्हें मणिपाल अस्पताल से जीवन रक्षक उपकरणों पर स्थानांतरित किया गया था और कई हफ्तों से उनका गहन चिकित्सा उपचार चल रहा था।
बेंगलुरु के कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (केआईएमएस) के डॉक्टरों ने बताया कि फेफड़ों की विफलता के कारण उन्हें एक्स्ट्राकॉर्पोरियल लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था और फेफड़े के प्रत्यारोपण की संभावना पर विचार किया जा रहा था। बहुविषयक चिकित्सा दल द्वारा निरंतर निगरानी के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती चली गई।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, डी. सुधाकर ने चित्रदुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में भी कार्य किया और वे हिरियूर से चार बार विधायक रहे, इससे पहले वे चल्लाकेरे का प्रतिनिधित्व कर चुके थे।
श्री सुधाकर का जन्म 28 मार्च, 1961 को चल्लाकेरे में हुआ था। उन्होंने बी.कॉम की डिग्री पूरी करने के बाद राजनीति में प्रवेश किया और दो दशकों से अधिक समय तक कर्नाटक की राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वे उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के करीबी माने जाते थे, जिन्होंने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें घनिष्ठ सहयोगी और समर्पित लोक सेवक बताया।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति करार दिया ।मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने एक समर्पित लोक सेवक और दयालु नेता को खो दिया है। उन्होंने हाल ही में अस्पताल में श्री सुधाकर से मिलने का उल्लेख किया और कहा कि उन्हें उनके स्वस्थ होने की उम्मीद है।
श्री सिद्दारमैया ने कहा, "उस समय मुझे उनके ठीक होने की उम्मीद थी। श्री सुधाकर जनसेवा और जनता के कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। डॉक्टरों के प्रयासों एवं जन प्रार्थनाओं के बावजूद मंत्री को बचाया नहीं जा सका।"उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने श्री सुधाकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें निर्वाचन क्षेत्र के विकास और जन कल्याण के प्रति समर्पित एक गतिशील प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि श्री सुधाकर अक्सर विकास प्रस्ताव और सिंचाई संबंधी अनुरोध लेकर आते थे, जिनमें भद्रा अपर बैंक परियोजना से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल थीं।
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