बेंगलुरु , अप्रैल 20 -- कर्नाटक में बड़े पैमाने पर सरकारी भर्ती अभियान पर लगी रोक पर राज्य मंत्रिमंडल इस मद्दे पर 24 अप्रैल को विचार कर सकता है।

राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों के लिए आंतरिक आरक्षण ढांचे को सुलझाने की प्रक्रिया के चलते 2.5 लाख से अधिक रिक्तियां अभी भी लंबित हैं। इस देरी की मुख्य वजह एक नीतिगत फैसला है, जो अब एक राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, जब तक आंतरिक आरक्षण के स्वरूप को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक लगभग 65,000 रिक्तियों पर भर्ती प्रक्रिया नहीं बढ़ सकती। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए, कर्नाटक सरकार ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के वास्ते 24 अप्रैल को मंत्रिमंडल की एक विशेष बैठक बुलाई है। यह बैठक पहले 27 मार्च को निर्धारित थी, लेकिन नौ अप्रैल को दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट में हुए उपचुनावों के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

चुनावी प्रक्रिया अब खत्म हो चुकी है और भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाने के बढ़ते दबाव के बीच सरकार अब लंबे समय से अटकी एक फ़ाइल पर फिर से विचार कर रही है। इस जल्दबाज़ी की वजह पूरे राज्य में बेरोज़गार युवाओं के बीच बढ़ता असंतोष है। इस साल की शुरुआत में, 24 फरवरी को हुबली में नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा किए गए एक बड़े विरोध प्रदर्शन ने सरकारी भर्तियों में हो रही देरी को सबके सामने ला दिया था और इस मामले में कार्रवाई की मांग को और तेज़ कर दिया था।

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