बेंगलुरु , जून 16 -- कर्नाटक पुलिस ने पाकिस्तान से जुड़े एक बड़े 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर गिरोह के कथित सरगना को भी हिरासत में लिया है।

पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था और खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, सीमा शुल्क या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाता था।

जांचकर्ताओं के अनुसार ठग फोन और वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते-धमकाते थे और झूठा दावा करते थे कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। इसके बाद पीड़ितों को तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' में होने का डर दिखाकर उनसे रकम वसूली जाती थी।

पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया, जबकि पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड को भी पकड़ लिया गया है। प्रारंभिक जांच में इस रैकेट के पाकिस्तान स्थित संचालकों से संपर्क के संकेत मिले हैं, जो कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क के कुछ हिस्सों का संचालन और समन्वय कर रहे थे।

आरोपियों ने ठगी के लिए फर्जी बैंक खातों, सिम कार्डों और विभिन्न डिजिटल संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया। पुलिस जब्त किए गए मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों, वित्तीय लेन-देन और संचार रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, लाभार्थियों तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पहचान की जा रही है। धन के प्रवाह और डिजिटल गतिविधियों का पता लगाकर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

पुलिस के अनुसार 'डिजिटल अरेस्ट' देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों में शामिल हो चुका है। इस तरह की ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम्स या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।

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