बेंगलुरु , जून 26 -- कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार के दूसरे चरण में नये चेहरे देखने को मिल सकते हैं और इनमें नौजवानों की खासी तादाद हो सकती है। इसकी वजह यह है कि कांग्रेस नेतृत्व 20 शेष मंत्री पदों को भरते समय जातिगत और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ-साथ पीढ़ीगत बदलाव पर भी विचार कर रहा है।

मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार शनिवार को कांग्रेस आलाकमान के साथ महत्वपूर्ण चर्चा के लिए नयी दिल्ली जाने वाले हैं। वहां लंबे समय से लंबित कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दिये जाने की उम्मीद है। अपनी यात्रा से पहले श्री शिवकुमार ने संकेत दिया कि पहली बार जीतने वाले विधायकों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिससे युवा विधायकों के मंत्री बनने की संभावना बढ़ गयी है।

इस कदम ने सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है, और माना जा रहा है कि उपलब्ध सीटों के लिए 60 से अधिक विधायक इस दौड़ में शामिल हैं। जहां कई वरिष्ठ नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री की टिप्पणियों ने इन उम्मीदों को बल दिया है कि पार्टी अनुभव और नये नेतृत्व के मिश्रण को चुन सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया भी विस्तारित मंत्रिमंडल में अपने समर्थकों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कांग्रेस आलाकमान के लिए राज्य में पार्टी के दो मुख्य शक्ति केंद्रों के हितों के बीच संतुलन बनाने की क्षमता की एक बड़ी परीक्षा बन गयी है।

अंतिम निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाले कांग्रेस आलाकमान के लिए जाने की उम्मीद है। इसमें चयन प्रक्रिया के दौरान सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है।दावेदार वरिष्ठ नेताओं में टी बी जयचंद्र, के षडाक्षरी और यशवंत रायगौड़ा पाटिल शामिल हैं, जबकि ए एस पोन्नन्ना, शरत बच्चेगौड़ा और बेलूर गोपालकृष्ण को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

इस कैबिनेट विस्तार से सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों को एक नया रूप मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पार्टी आगामी चुनावी चुनौतियों से पहले अपनी आकांक्षाओं को संतुलित करने, सरकार को मजबूत करने और एकजुटता बनाये रखने का प्रयास कर रही है।

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