बेंगलुरु , जुलाई 13 -- कर्नाटक के मंदिरों में भक्तों के चढ़ावे की सुरक्षा और मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार मुज़राई विभाग के तहत आने वाले मंदिरों में हुंडी (दान-पात्र) की सुरक्षा के लिए एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रही है।
नयी प्रकिया दान पेटियों, नगद संग्रह और गिनती की प्रक्रियाओं की सख़्त निगरानी करेगी। साथ ही, चोरी, दुरुपयोग और गड़बड़ियों को रोकने के लिए बेहतर निगरानी एवं जवाबदेही के उपाय भी लागू किए जाएंगे।
मुजराई मंदिर कर्नाटक सरकार के हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभागद्वारा संचालित धार्मिक संस्थान हैं। 34,000 से अधिक राज्य-प्रशासित मंदिरों का प्रबंधन करने वाला यह विभाग राजस्व के आधार पर उन्हें ए, बी और सी श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। प्रमुख मंदिरों में कोल्लूर स्थित कुक्के श्री सुब्रह्मण्य मंदिर और मूकाम्बिका मंदिर शामिल हैं । यह कदम मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निर्देशों के बाद उठाया गया है जिनमें राज्य के प्रमुख मुज़रई मंदिरों में सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने के लिए कहा गया था। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हुंडी लगाने, खोलने और दान गिनने वाले क्षेत्रों में पूरी तरह से सीसीटीवी से निगरानी सुनिश्चित करें।
प्रस्तावित एसओपी के तहत, मंदिर प्रशासन को दान संभालने के लिए एक जैसी प्रक्रियाएं अपनानी होंगी। इनमें हुंडी वाले इलाकों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना, दान का पूरा रिकॉर्ड रखना, गिनती की गतिविधियों की वीडियो रिकॉर्डिंग करना और पूरी प्रक्रिया के दौरान अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करना शामिल है। इन मार्गदर्शनों का उद्देश्य मंदिर के आर्थिक कामकाज में ज़्यादा पारदर्शिता लाना और भक्तों के दान का हिसाब-किताब सुरक्षित तरीके से रखना है। अधिकारियों ने कहा कि नयी प्रणाली हर चरण पर ज़िम्मेदारी तय करने में मदद करेगी जिसमें हुंडी खोलने से लेकर जमा हुई रकम की गिनती करने और उसे जमा करने तक की प्रक्रिया शामिल हैं।
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