बेंगलुरु , मार्च 12 -- कर्नाटक के मंत्री ईश्वर खंड्रे ने गुरुवार को रसोई गैस (एलपीजी) की मौजूदा कमी को लेकर केंद्र सरकार के कामकाज की कड़ी आलोचना की और इसे घोर कुप्रबंधन, बेहद खराब योजना तथा एक बड़ी विफलता करार दिया।

श्री खंड्रे ने पत्रकारों से कहा कि 'पश्चिम एशिया' में तनाव के कारण पैदा होने वाला वैश्विक ऊर्जा संकट पहले से ही तय था और केंद्र सरकार को रसोई गैस का पर्याप्त भंडार जमा करके और अन्य विकल्पों की तलाश करके इसके लिए तैयार रहना चाहिए था। उन्होंने केंद्र सरकार पर आने वाली बाधाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और कहा कि दूरदर्शिता की इसी कमी के कारण अब आम परिवारों और व्यापारियों को बेवजह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

श्री खंड्रे ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए और उनके स्थान पर किसी ऐसे कुशल मंत्री को नियुक्त किया जाना चाहिए जो इतनी गंभीर स्थिति को संभालने में सक्षम हो।

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ने वाले असर का जिक्र करते हुए श्री खंड्रे ने बताया कि बेंगलुरु में होटलों, रेस्तरां और सामुदायिक रसोईघरों को रसोई गैस की कम आपूर्ति मिल रही है, जिससे उनके कामकाज में रुकावट आ सकती है और रोजमर्रा की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया, जिसमें आम परिवारों और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं, दोनों के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है, ताकि स्थिति और न बिगड़े।

श्री खंड्रे की ये टिप्पणियां उन रिपोर्टों के बीच आई हैं जिनमें दिखाया गया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और घरेलू नीति की खामियों की वजह से स्थानीय स्तर पर रसोई गैस की उपलब्धता कम हो गयी है, जिससे विशेष रूप से शहरों के व्यावसायिक उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर पहले से योजना बनाई जाती और संसाधनों का सही प्रबंधन होता, तो वर्तमान संकट को कम किया जा सकता था।

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