बेंगलुरु , जुलाई 4 -- कर्नाटक में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के शुरू होने के कुछ ही दिनों के भीतर उस पर सवालिया निशान लगने लगे हैं।
बूथ स्तर के अधिकारी मतदाताओं को कथित तौर पर परस्पर विरोधी निर्देश जारी कर रहे हैं, जिससे चुनाव आयोग के सत्यापन अभ्यास का समान कार्यान्वयन करने को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने इन शिकायतों के बाद निर्धारित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने का आदेश दिया है। 30 जून से शुरू हुए इस महीने भर चलने वाले अभियान का उद्देश्य पूरे राज्य में मतदाता सूचियों में सुधार करना है। इसके तहत अस्थाई मतदाता सूची का प्रकाशन 5 अगस्त को होना तय है। अधिकारियों की ओर से मिल रहे असंगत मार्गदर्शन की रिपोर्टों ने इस प्रक्रिया के सुचारू संचालन पर सवाल खड़े कर दिये हैं। इसके अलावा, मतदाता रिकॉर्ड में त्रुटियों के आने की आशंका भी पैदा हो गयी है।
रिपोर्टों के अनुसार, जिन मतदाताओं को "वंशज" के रूप में अपनी पहचान स्थापित करनी है और जिन लोगों के नाम 2002 की मतदाता सूची से गायब हैं, उन्हें अनिवार्य गणना प्रपत्र भरते समय बीएलओ से विरोधाभासी निर्देश मिल रहे हैं। भ्रम का एक मुख्य क्षेत्र प्रपत्र में दिए गए "नाम" कॉलम से संबंधित है। जहां कुछ बीएलओ ने कथित तौर पर मतदाताओं को अपना नाम लिखने का निर्देश दिया, वहीं अन्य ने उन्हें माता-पिता या उस रिश्तेदार का नाम दर्ज करने की सलाह दी जिसके माध्यम से वे आवश्यक संबंध स्थापित कर रहे थे। इस वजह से कई लोग सही प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति में हैं।
पहले से भरे हुए प्रपत्रों में त्रुटियों को सुधारने को लेकर भी परस्पर विरोधी निर्देश सामने आए हैं। कई मामलों में, मतदाताओं को कथित तौर पर वर्तनी को बिल्कुल वैसा ही रखने के लिए कहा गया जैसा कि वे 2002 की मतदाता सूची में थी। अन्य लोगों को वर्तनी सुधारने की सलाह दी गई है। अधिकारी इस संबंध में खुद भी कथित तौर पर दुविधा में थे।
इन कथित विसंगतियों ने एसआईआर अभ्यास के कार्यान्वयन में एकरूपता की कमी को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है। संबंधित अधिकारियों द्वारा दिशानिर्देशों की अलग-अलग व्याख्या करने की वजह से मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियां हो सकती हैं या सत्यापन में देरी हो सकती है। कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबुकुमार ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बूथ स्तर के अधिकारी पुनरीक्षण अभ्यास को संचालित करने वाले चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करें।
जिला चुनाव अधिकारियों को भेजे एक पत्र में, मुख्य चुनाव अधिकारी ने उल्लेख किया कि गणना प्रपत्र के वितरण के तरीके को लेकर भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। चुनाव आयोग ने 30 जून से घर-घर जाकर प्रपत्र वितरित करने का आदेश दिया था। कुछ बीएलओ कथित तौर पर मतदाताओं से घरों का दौरा करने के बजाय उनके कार्यालयों या अन्य स्थानों से प्रपत्र लेने के लिए कह रहे थे।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि प्रत्येक बीएलओ घर-घर जाकर दौरा करे और पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान आयोग के निर्देशों से कोई विचलन न हो। उन्होंने चुनाव अधिकारियों को मतदाता सुविधा केंद्रों की उपलब्धता का प्रचार-प्रसार करने का भी निर्देश दिया। मतदाता सुविधा केंद्रों में गणना प्रपत्र भरने में कठिनाइयों का सामना कर रहे मतदाता सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
ये कथित कमियां कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर तेज होते राजनीतिक विवाद के बीच आई हैं। विपक्षी दलों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि पूरे राज्य में दिशानिर्देशों को समान रूप से लागू नहीं किया गया तो योग्य मतदाताओं को सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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