बेंगलुरु , मई 19 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सरकारी सड़क परिवहन निगमों से जुड़ी ट्रेड यूनियनों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) को वेतन संशोधन और कर्मचारियों के बकाया भुगतान को लेकर बुधवार से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज और न्यायमूर्ति के मन्मथ राव की अवकाशकालीन पीठ ने घरेलू सहायिका सी वेदावती और निर्माण श्रमिक एचवी श्रीधर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि हड़ताल से राज्य भर के यात्रियों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
पीठ ने जेएसी और उससे संबद्ध यूनियनों को निर्देश दिया कि वे 29 अप्रैल को जारी किये गये हड़ताल की नोटिस पर कोई कार्रवाई न करें। अदालत ने राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने के लिए दो दिन का समय भी दिया कि श्रमिकों की शिकायतों के समाधान के लिए परिवहन मंत्री या मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक कब बुलायी जा सकती है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम हुइलगोल ने दलील दी कि यदि हड़ताल पर आगे बढ़ने की अनुमति दी गयी तो सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर निर्भर रहने वाले लाखों यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी।
जेएसी का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता क्लिफ्टन डी रोजारियो ने अदालत को बताया कि यूनियनों की मांगें जायज हैं और कोई बहुत बड़ी या 'अवास्तविक' नहीं हैं। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के साथ बातचीत करने और विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का आग्रह किया।
राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि परिवहन कर्मचारियों को पहले ही 12.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि दी जा चुकी है और लंबित बकाया भी दे दिया गया है। इस पर पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पहले से घोषित वृद्धि को देखते हुए कर्मचारियों को हड़ताल से बचना चाहिए।
जेएसी एक जनवरी 2024 से पूर्वव्यापी प्रभाव से वेतन में 25 प्रतिशत की वृद्धि की मांग कर रही है। इसके साथ ही कोविड-19 महामारी के दौरान काटे गये वेतन सहित अन्य बकाये के भुगतान की भी मांग कर रहे हैं।
इस वर्ष की शुरुआत में परिवहन कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने पहले अप्रैल से प्रभावी 12.5 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की थी।
इस बीच कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक अकरम पाशा ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में व्यवधान रोकने के लिए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।
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