बेंगलुरु , अप्रैल 24 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें तुमकुरु शहर में स्थित कांग्रेस भवन ट्रस्ट (सीबीटी) को 23 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य के मुकाबले मात्र 17 लाख रुपये में दो एकड़ जमीन आवंटित करने के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। याचिका में इस सौदे में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश विभू भाखरू और न्यायमूर्ति सीएम पूनाचा ने राज्य सरकार और शहरी विकास विभाग तथा तुमकुरु जिला प्रशासन सहित कई अधिकारियों को नोटिस जारी कर आरोपों पर उनका जवाब मांगा है।
यह मामला तुमकुरु के रियल एस्टेट कारोबारी गोपालकृष्णन एनएन द्वारा दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि लगभग 23 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन कांग्रेस से जुड़े एक ट्रस्ट को महज 17 लाख रुपये में आवंटित कर दी गई।
इस विवाद के केंद्र में तीन मुख्य आरोप हैं जिन्होंने सबका ध्यान खींचा है-जिस ट्रस्ट को अंततः जमीन मिली, वह शुरुआती अनुरोध के समय अस्तित्व में ही नहीं था, जमीन बाजार दर से काफी कम, भारी रियायती मूल्य पर आवंटित की गई और यह निर्णय कैबिनेट की मंजूरी सहित आधिकारिक माध्यमों से लिया गया।
याचिका के अनुसार जमीन आवंटन की प्रक्रिया राजीव गांधी शहरी और ग्रामीण विकास ट्रस्ट (आरजीयूआरटी) द्वारा आवेदन किए जाने के बाद शुरू हुई, जिसका गठन 2023 में हुआ था। प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान बहुत कम समय में ही एक एकड़ जमीन के अनुरोध को बढ़ाकर दो एकड़ कर दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अंतिम आवंटन आरजीयूआरटी को नहीं बल्कि 'कांग्रेस भवन ट्रस्ट' (सीबीटी) नामक एक संस्था को किया गया। इस संस्था का पंजीकरण 6 अगस्त 2025 को हुआ, यानी जमीन आवंटन की मंजूरी मिलने के बाद। इस विसंगति को मामले में एक मुख्य अनियमितता के रूप में उजागर किया गया है।
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