बेंगलुरु , अगस्त 06 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति एच एन नागमोहन दास आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अनुसूचित जातियों के भीतर आंतरिक आरक्षण लागू करने के राज्य कैबिनेट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की एकलपीठ ने जूडो बंजारा फाउंडेशन (पंजीकृत) के महासचिव खेम सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव, राज्य अनुसूचित जाति आयोग तथा अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि 16 अक्टूबर, 2025 को इसी से संबंधित एक अन्य मामले में जारी अंतरिम आदेश वर्तमान याचिका पर भी लागू रहेगा। अंतरिम आदेश के अनुसार भर्ती प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगले आदेश तक अंतिम नियुक्ति आदेश जारी नहीं किये जाएंगे।

याचिका में 19 अगस्त, 2025 को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 101 अनुसूचित जातियों के वर्गीकरण तथा राज्य में आंतरिक आरक्षण लागू करने संबंधी निर्णय को चुनौती दी गयी है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस वर्गीकरण के तहत सबसे अधिक पिछड़ी मानी गयी 59 अनुसूचित जातियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है, जबकि शेष 80 प्रतिशत आरक्षण चार अन्य अनुसूचित जाति समूहों को आवंटित किया गया है। याचिका में इस वर्गीकरण को मनमाना, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत तथा असंवैधानिक बताया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि संविधान के तहत अनुसूचित जातियों की सूची में किसी समुदाय को शामिल करने, संशोधित करने अथवा निर्दिष्ट करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को है और राज्य सरकार को इस प्रकार का वर्गीकरण बदलने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता ने मंत्रिमंडल के निर्णय तथा इस नीति को लागू करने वाली बाद की सरकारी अधिसूचनाओं को निरस्त करने की मांग की है।

इसके अलावा याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि राज्य सरकार को 28 दिसंबर, 2022 से पूर्व लागू आरक्षण व्यवस्था के अनुसार ही भर्ती प्रक्रिया संचालित करने का निर्देश दिया जाये। प्रारंभिक सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित