बेंगलुरु , अप्रैल 24 -- कर्नाटक में उन तीन कर्मचारियों को निलंबित किये जाने के बावजूद जिन पर सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईटी) देने आये छात्रों से परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले कथित तौर पर उनका जनेऊ उतरवाने का आरोप था, यहां एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
यह घटना बेंगलुरु के एक परीक्षा केंद्र पर 23 अप्रैल को आयोजित सीईटी के दौरान हुई। जैसे ही इस घटना का पता चला कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के निर्देश पर मदीवाला स्थित कृपानिधि कॉलेज के इन तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया, जिन पर जनेऊ उतरवाने का आरोप है। इनमें दो वरिष्ठ महिला कर्मचारी भी शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किये थे कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान जनेऊ जैसे धार्मिक प्रतीकों को नहीं हटाया जाना चाहिए। हालांकि, ऐसे आरोप सामने आये हैं कि इसके बावजूद उम्मीदवारों से जनेऊ उतारने को कहा गया, जिससे भारी आक्रोश फैल गया।
केईए ने बेंगलुरु शहरी जिला मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है। प्राधिकरण का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह उल्लंघन जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है। अधिकारियों ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषी पाये जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
यह मामला तेजी से राजनीतिक मुद्दा बन गया है। भाजपा ने राज्य सरकार पर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने या अनुमति देने का आरोप लगाया है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। वहीं, सरकार का कहना है कि परीक्षा दिशा-निर्देशों के किसी भी उल्लंघन से सख्ती से निपटा जायेगा, चाहे इसके लिए कोई भी जिम्मेदार हो।
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