बेंगलुरु , जून 29 -- कर्नाटक के सरकारी विद्यालयों में रोबोटिक्स, कोडिंग और स्टीम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित) की शिक्षा शुरू होने जा रही है। छात्रों को भविष्य के करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से यह कदम टेक्नोलॉजी आधारित पढ़ाई की दिशा में बड़ा कदम है।
कर्नाटक का विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग सिर्फ किताबों तक सीमित रहने की बजाय गतिविधि आधारित और प्रायोगिक शिक्षा पर जोर दे रहा है। इसके लिए विभाग विद्यालय पाठ्यक्रम में रोबोटिक्स, कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग को शामिल करने पर काम कर रहा है।
इस पहल का मकसद सरकारी विद्यालयों के बच्चों को कम उम्र में ही उभरती हुई तकनीकों से रूबरू कराना है। इससे तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था के दौर में बच्चों के भीतर विश्लेषणात्मक सोच, रचनात्मकता, समस्याओं को सुलझाने की क्षमता और नये प्रयोग करने के हुनर का विकास होगा।
अधिकारियों ने बताया कि छात्र प्रायोगिक परियोजनाओं और वास्तविक जीवन के उदाहरणों के जरिये विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित को करीब से सीख सकेंगे। इससे पढ़ाई और उद्योगों की जरूरतों के बीच का अंतर कम करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "इसका उद्देश्य बच्चों में विज्ञान और तकनीक के प्रति उत्सुकता जगाना है, ताकि वे इन क्षेत्रों में भविष्य के अवसरों को तलाश सकें।"बदले पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल साक्षरता के मॉड्यूल भी शामिल होंगे। इससे छात्र समझ सकेंगे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल ऐपों के पीछे के एल्गोरिदम कैसे काम करते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस जानकारी से बच्चे तकनीक का इस्तेमाल समझदारी और जिम्मेदारी से करना सीखेंगे।
आधुनिकीकरण की इस पहल के तहत सरकारी विद्यालयों में पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह ह्वाइटबोर्ड लगाने की उम्मीद है। इसके साथ ही पाठ को और अधिक इंटरैक्टिव बनाने के लिए क्लास में डिजिटल लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल बढ़ाया जायेगा।
यह कदम विद्यालयी छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के देशव्यापी प्रयासों के बीच उठाया गया है। सीबीएसई से जुड़े विद्यालयों के संशोधित पाठ्यक्रम में कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पहले ही शामिल किया जा चुका है। वर्ष 2029 से ये विषय कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए अनिवार्य होंगे।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कर्नाटक की इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे पीछे न छूटें, क्योंकि अब उच्च शिक्षा और रोजगार में तकनीक की भूमिका सबसे अहम होती जा रही है।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि रोबोटिक्स, कोडिंग और 'स्टीम' शिक्षा की शुरुआत से कक्षाएं नये प्रयोगों वाले केंद्रों में बदल जायेंगी। इससे बच्चों में अनुसंधान, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा और वे तकनीक प्रधान दुनिया में करियर बनाने के लिए तैयार हो सकेंगे।
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