बेंगलुरु , मई 03 -- कर्नाटक की दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सभी की निगाहें कल आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
ये परिणाम न केवल दो सीटों का फैसला करेंगे, बल्कि राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच भविष्य के राजनीतिक नैरेटिव को भी तय करेंगे।
संख्यात्मक रूप से इन नतीजों से सिद्दारमैया सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन राजनीतिक रूप से इनके गहरे मायने हैं। कांग्रेस के लिए यह केवल जीत-हार का सवाल नहीं है, बल्कि अपनी राजनीतिक गति को बरकरार रखने की चुनौती है। यदि पार्टी को यहाँ झटका लगता है, तो विपक्ष को यह कहने का मौका मिल जाएगा कि कांग्रेस का 'गारंटी मॉडल' अब कमजोर पड़ रहा है और सरकार आंतरिक सत्ता संघर्ष के कारण प्रशासनिक पकड़ खो रही है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच के शक्ति संतुलन को देखते हुए भी इन नतीजों को बेहद बारीकी से देखा जा रहा है।
भाजपा के लिए ये उपचुनाव राज्य में अपनी वापसी का रोडमैप साबित हो सकते हैं। 2023 की विधानसभा हार के बाद पार्टी को यह साबित करना है कि वह अभी भी एक मजबूत विकल्प है। विशेष रूप से बागलकोट में जीत भाजपा के लिए उत्तर कर्नाटक के लिंगायत गढ़ में उसकी पकड़ को फिर से पुख्ता करेगी। वहीं, दावणगेरे दक्षिण में भाजपा की कोशिश कांग्रेस के पारंपरिक शहरी-अल्पसंख्यक गठबंधन में सेंध लगाने की है।
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