बैतूल , अगस्त 24 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के नगरीय निकायों में पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद नियमित जलापूर्ति का संकट दूर नहीं हो सका है। बारिश के मौसम में भी जिले के 10 नगरीय निकायों में केवल बैतूल बाजार, सारणी और चिचोली में प्रतिदिन पेयजल की आपूर्ति हो रही है, जबकि अन्य निकायों में एक या दो दिन के अंतराल से पानी पहुंच रहा है। गर्मी के दौरान कई क्षेत्रों में टैंकरों से जलापूर्ति की जरूरत पड़ती है।
बैतूल नगर पालिका में यूआईडीएसएसएमटी तथा अमृत परियोजना के पहले और दूसरे चरण के तहत पेयजल व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च की गई है। इसके बावजूद कई वार्डों में नियमित जलापूर्ति की शिकायतें बनी हुई हैं। पाइपलाइन में लीकेज, पाइप फूटने और तकनीकी खराबियों के कारण कई बार निर्धारित समय पर पानी नहीं पहुंच पाता। इससे करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी योजनाओं की जमीनी उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बैतूल नगर पालिका क्षेत्र में 685 हैंडपंप चालू और 25 बंद हैं। सारणी में 340 चालू और 44 बंद, मुलताई में 116 चालू और 12 बंद, बैतूल बाजार में 18 चालू और चार बंद, भैंसदेही में 122 चालू और पांच बंद, चिचोली में 65 चालू और 10 बंद तथा शाहपुर में 100 चालू और 14 हैंडपंप बंद हैं।
नगरीय क्षेत्रों में पेयजल के साथ सफाई व्यवस्था को लेकर भी नागरिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होने, नालियों की समय पर सफाई नहीं किए जाने तथा कचरा उठाव में लापरवाही की शिकायतें हैं। बारिश के दौरान नालियों में कचरा जमा होने से जल निकासी प्रभावित होने और गंदा पानी सड़कों तथा आसपास के क्षेत्रों में फैलने की आशंका बनी रहती है।
पेयजल संकट के समाधान के लिए नई योजनाओं के साथ पुरानी पाइपलाइनों की नियमित मरम्मत, जलस्रोतों का संरक्षण, बंद हैंडपंपों को तत्काल चालू करने और वार्डवार जल वितरण की निगरानी जरूरी है। सफाई व्यवस्था में भी नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।
बारिश में जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद यदि कई शहरों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, तो गर्मी में संभावित संकट का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में नगरीय निकायों को योजनाओं के निर्माण और राशि खर्च करने के साथ उनकी जमीनी उपयोगिता की भी समीक्षा करनी होगी।
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