बैतूल , अगस्त 09 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की पवित्र नगरी मुलताई में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के अधूरे रहने के बाद अब उन्हें पूरा करने के लिए पूरक डीपीआर तैयार की जा रही हैं। इससे सरकारी धन पर अतिरिक्त भार पड़ने के साथ ही परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नगर में बीते कुछ वर्षों में चार प्रमुख विकास परियोजनाएं अधूरी रह गई हैं। इन्हें पूरा करने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक की पूरक योजनाएं तैयार की गई हैं। इनमें हरदौली जलावर्धन योजना के पीएचई घटक के लिए अमृत 2.0 के तहत करीब सात करोड़ रुपये की पूरक योजना पर काम चल रहा है। हरदौली बांध के ब्रेस्ट वेयर और ओवर नदी कंक्रीट निर्माण के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। वहीं सीवर लाइन डालने के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए करीब 80 लाख रुपये का पुनरीक्षित एस्टीमेट तैयार किया गया है।

सीवर लाइन परियोजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि मूल डीपीआर में सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का प्रावधान था। इसके बावजूद अब इन्हीं सड़कों के सुधार के लिए अतिरिक्त राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। करीब 25 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त होने और नगर पालिका परिसर में भी खुदाई किए जाने के बाद लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। मामले में अब तक न तो जांच हुई और न ही जिम्मेदारी तय की गई है।

करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सूर्यनारायण सरोवर में भी तकनीकी योजना पर सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार मूल एस्टीमेट में ब्रेस्ट वेयर का प्रावधान नहीं किया गया था। अब इसके निर्माण के लिए करीब 90 लाख रुपये का अतिरिक्त एस्टीमेट तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेजा गया है। सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की डीपीआर तैयार करते समय इतनी महत्वपूर्ण संरचना का प्रावधान क्यों नहीं किया गया।

हरदौली बांध के ब्रेस्ट वेयर को लेकर भी चिंता सामने आई है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बने बांध में बताया गया है कि नाला क्लोजर ग्राउंड लेवल से ब्रेस्ट वेयर की ऊंचाई करीब 10 फीट से अधिक है और उसका आधार कच्ची मुरम पर छोड़ा गया था। निर्माण के बाद मिट्टी का कटाव शुरू होने से स्थायी सुधार के लिए अब करीब तीन करोड़ रुपये की नई डीपीआर तैयार की गई है।

हरदौली पेयजल परियोजना बांध और पीएचई घटक के रूप में तैयार की गई थी। इसे आगामी 55 वर्षों की आबादी को ध्यान में रखकर बनाया गया था और बांध की जल भंडारण क्षमता 4.7 एमसीएम निर्धारित की गई थी। पेयजल वितरण व्यवस्था पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद सामने आया कि मूल डीपीआर में घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने का पर्याप्त प्रावधान नहीं था। इसके बाद अमृत 2.0 के तहत करीब सात करोड़ रुपये की पूरक योजना स्वीकृत हुई, जिसका लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा है।

इन परियोजनाओं को लेकर जवाबदेही का सवाल भी उठ रहा है। यदि मूल डीपीआर में जरूरी कार्य शामिल नहीं थे तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि कार्य मूल योजना में शामिल थे तो अतिरिक्त एस्टीमेट की जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल बना हुआ है।

नगर पालिका के उपयंत्री महेश शर्मा ने बताया कि फिलहाल हरदौली बांध में अधिक कटाव नहीं हुआ है। स्थायी सुधार के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की डीपीआर मंजूरी के लिए भेजी गई है। सूर्यनारायण सरोवर के ब्रेस्ट वेयर के लिए 90 लाख रुपये का एस्टीमेट तथा हरदौली पेयजल योजना के लिए अमृत 2.0 के तहत सात करोड़ रुपये की पूरक योजना पर काम जारी है।

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