रांची , सितंबर 22 -- झारखंड के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि करमा पूजा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी प्रकृति, संस्कृति और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव है।
यह पर्व हमें प्रकृति के सम्मान, कर्म के महत्व और आपसी प्रेम का संदेश देता है। जहां कर्म है, वहीं धर्म है।"प्रकृति, हरियाली, भाई-बहन के अटूट प्रेम और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक करमा पूजा जामताड़ा में पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंत्री डॉ. अंसारी ने जामताड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित करमा पूजा कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और बहनों का आशीर्वाद लेते हुए सभी को पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। पारंपरिक गीत-संगीत, पूजा-अर्चना और करम नृत्य से पूरा वातावरण लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। करमा पूजा के विभिन्न कार्यक्रमों में पहुंचने पर बड़ी संख्या में बहनों ने मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें अपना भाई बताते हुए आशीर्वाद दिया।
इस दौरान बहनों ने कहा- भैया हो तो डॉ. इरफान अंसारी जैसा, जो हर सुख-दुख में हमारे साथ खड़े रहते हैं, बहनों की आवाज उठाते हैं और उन्हें सम्मान देते हैं। बहनों के इस स्नेह और आत्मीय स्वागत से मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि बहनों का यह विश्वास उनके लिए किसी सम्मान से कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी और लोक संस्कृति से है। करमा पूजा इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।
महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा- यह बिहार नहीं, झारखंड है और यह जामताड़ा है। यहां बहन-बेटियों का सम्मान हमारी संस्कृति और संस्कार का हिस्सा है। हमारी बहनें जिस विश्वास के साथ हमें अपना भाई मानती हैं, वह मेरे लिए केवल स्नेह नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी है।"बिहार में हाल में महिलाओं से जुड़ी एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की इज्जत, सुरक्षा और सम्मान से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं होना चाहिए। महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
महिला सशक्तिकरण पर मंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा- "बहनों का सम्मान केवल मंच पर माला पहनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का अधिकार देना ही सच्चा सम्मान है।"उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 'मंईयां सम्मान योजना' जैसी पहल के माध्यम से महिलाओं को सहयोग दिया जा रहा है, ताकि हमारी बहन-बेटियां आत्मनिर्भर बनें और अपने परिवार एवं राज्य का नाम रोशन करें।
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