कोलकाता , मार्च 09 -- पश्चिम बंगाल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर राज्य में आगामी चुनावों के संचालन में कई बदलावों की मांग की जिनमें चुनाव कम चरणों में कराने और बड़े बहुमंजिला आवासीय परिसरों के भीतर मतदान केंद्र स्थापित करने की मांगें शामिल है।
शिशिर बजोरिया, तापस रॉय और जगन्नाथ चट्टोपाध्याय के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के दौरे पर आए निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपनी मांगें रखीं।
ज्ञापन में पार्टी ने आग्रह किया कि चुनाव को एक चरण में या अधिकतम दो चरणों में सीमित समय के भीतर कराया जाए, न कि पिछले चुनावों की तरह छह सप्ताह में फैले सात-आठ चरणों में। भाजपा का कहना है कि कम चरणों में चुनाव कराने से हिंसा पर नियंत्रण रखने और प्रशासनिक निगरानी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
पार्टी ने बड़े बहुमंजिला आवासीय परिसरों के भीतर मतदान केंद्र स्थापित करने की भी मांग की। भाजपा का आरोप है कि पिछले चुनावों में स्थानीय पुलिस थानों ने ऐसे परिसरों से लिखित अस्वीकृति पत्र लेकर वहां मतदान केंद्र स्थापित नहीं होने दिए, जिससे निवासियों को कहीं और जाकर मतदान करना पड़ा।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस कल्याण ऑर्गनाइजेशन पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह संगठन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी का अग्रिम संगठन की तरह काम करता है और पुलिस कर्मियों पर दबाव डालता है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि यह संगठन पुलिस कर्मियों से उनके बैलेट पेपर जमा कराने के लिए दबाव डालता है और चुनाव संबंधी गतिविधियों को प्रभावित करने वाले अनौपचारिक निर्देश जारी करता है। पार्टी ने संगठन पर प्रतिबंध लगाने और उसके कार्यालयों को सील करने की मांग की।
मतदान प्रक्रिया के संबंध में भाजपा ने दो-स्तरीय मतदाता पहचान प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव भी दिया। इसके तहत मतदान केंद्र के बाहर तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवान पहले मतदाताओं की पहचान सत्यापित करेंगे और उसके बाद मतदान कक्ष के अंदर पीठासीन या मतदान अधिकारी द्वारा दोबारा जांच की जाएगी।
पार्टी ने यह भी सुझाव दिया कि राजनीतिक दलों के एजेंटों को मतदान कक्ष के भीतर बैठने के बजाय बाहर बैठने की व्यवस्था की जाए, जिससे मतदान कक्ष के अंदर व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का अनुचित प्रभाव न पड़े। भाजपा ने यह भी मांग की कि प्रत्येक मतदान केंद्र की निगरानी केवल सीएपीएफ द्वारा की जाए और वहां राज्य पुलिस, शहर पुलिस या स्वयंसेवकों की कोई भूमिका न हो, यहां तक कि कतार प्रबंधन में भी नहीं।
पार्टी ने सुझाव दिया कि मतदान अधिकारियों में राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों का समान प्रतिनिधित्व हो, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
ज्ञापन में चुनाव से पहले क्षेत्र में विश्वास बहाली और प्रभुत्व स्थापित करने के लिए सीएपीएफ की अग्रिम तैनाती, पिछले चुनावों में हिंसा या असामान्य मतदान प्रतिशत वाले बूथों को संवेदनशील घोषित करने, मतदान केंद्रों पर वेबकैम लगाने तथा मतगणना केवल जिला और उपमंडल मुख्यालयों में कड़ी निगरानी में कराने की भी सिफारिश की गयी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित