नयी दिल्ली , अक्टूबर 26 -- एलपीजी वितरकों ने कमीशन में बढ़ोतरी और लंबित परिचालन संबंधी समस्याओं का समाधान सहित अन्य मांगों को लेकर सोमवार को यहां के सीबीडी मैदान में प्रदर्शन किया।
एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 4,000 से अधिक वितरक शामिल हुए।
प्रदर्शन में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस शर्मा के साथ विभिन्न राज्यों के अध्यक्ष और एसोसिएशन के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
इस मौके पर शर्मा ने कहा कि वितरक वर्ष 2018 से कमीशन में व्यापक संशोधन की मांग कर रहे हैं। इस अवधि में एलपीजी की कीमतों और परिचालन लागत में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन वितरकों के कमीशन में उसके अनुरूप बढ़ोतरी नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कमीशन व्यवस्था वितरकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा, "2018 के बाद घरेलू एलपीजी की कीमत लगभग 450 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये तक पहुंच गयी है। वहीं, वाणिज्यिक एलपीजी की कीमत 1,100 रुपये से बढ़कर 3,033 रुपये हो गयी है। इसके बावजूद हमारे कमीशन में कोई समानुपातिक वृद्धि नहीं की गयी है।"उन्होंने कहा कि वितरक लगातार सरकार के सामने अपनी मांगें उठा रहे हैं। बढ़ती लागत के अनुरूप कमीशन में संशोधन की आवश्यकता का आकलन करने के लिए किए गए अध्ययन के बाद वर्ष 2022 में अंतरिम राहत दी गई थी, लेकिन कमीशन में व्यापक संशोधन की मांग अब भी लंबित है। उन्होंने कहा, "हम पिछले चार वर्षों से लगातार इन मुद्दों को उठा रहे हैं और सरकार के साथ बातचीत की मांग कर रहे हैं, लेकिन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।"एसोसिएशन ने गत 24 मार्च को जारी सरकार के उस आदेश का भी विरोध किया, जो पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का बुनियादी ढांचा उपलब्ध होने वाले क्षेत्रों में एलपीजी आपूर्ति बंद करने से संबंधित है।
श्री शर्मा ने कहा कि इस नीति से एलपीजी वितरकों के कारोबार पर असर पड़ सकता है और उपभोक्ताओं के पास उपलब्ध विकल्प सीमित हो सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन क्षेत्रों को लेकर चिंता जताई, जहां निजी कंपनियां पीएनजी नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं।
एसोसिएशन ने इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (ई-केवाईसी) सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण करीब 3.16 करोड़ एलपीजी कनेक्शन निलंबित किए जाने का मुद्दा भी उठाया। श्री शर्मा ने ऐसे प्रतिबंधों के औचित्य पर सवाल उठाते बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता को लेकर चिंता जतायी। इस संदर्भ में उन्होंने उच्चतम न्यायालय के केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले के फैसले का उल्लेख किया।
संगठन के अनुसार, वितरकों की ओर से मांगी गयी गैस की मात्रा से संबंधित इंडेंट में बदलाव किए जाने से आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, वितरकों पर गैस चूल्हे, रबर ट्यूब, लाइटर और एप्रन जैसे अन्य उत्पाद बेचने के लिए कथित तौर पर दबाव डालने का मुद्दा भी उठाया गया।
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