सिंगापुर , मई 30 -- वियतनाम के राष्ट्रपति एवं सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव तो लाम ने अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था के क्षरण को लेकर अप्रत्यक्ष चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया बढ़ते "विश्वास संकट" और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के चयनात्मक अनुपालन के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
शांग्री-ला डायलॉग 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देते हुए श्री तो लाम ने राष्ट्रों से आग्रह किया कि वे केवल संकट प्रबंधन तक सीमित न रहें, बल्कि एक ऐसे विश्व में शांति, स्थिरता और विकास को सक्रिय रूप से आकार दें जो गहरे परिवर्तनों से गुजर रहा है। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग और रक्षा नेताओं की उपस्थिति में वियतनामी राष्ट्रपति ने वर्तमान वैश्विक स्थिति को अनिश्चितता और प्रणालीगत दबावों से भरा बताया।
श्री तो लाम ने सिंगापुर में आयोजित शांग्री-ला डायलॉग 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए देशों से केवल संकटों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय शांति, स्थिरता और विकास को सक्रिय रूप से आकार देने का आह्वान किया। उन्होंने क्षेत्रीय रक्षा नेताओं, सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग तथा अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन संस्थान के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य गहरी अनिश्चितताओं और संस्थागत दबावों से घिरा हुआ है। उन्होंने कहा कि दुनिया तीन परस्पर जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान में कमी, विकास मॉडलों की विफलता और देशों के बीच घटता विश्वास शामिल है।
श्री लाम ने कहा, "हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया अनेक जोखिमों और अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। दुनिया पहले से अधिक जुड़ी हुई है, लेकिन अधिक संवेदनशील भी हो गयी है। परस्पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन दबाव और बाध्यताओं के प्रति भी अधिक असुरक्षित हो गयी है।" उन्होंने कहा कि मौजूदा अस्थिरता तीन बुनियादी संकटों का परिणाम है - अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का संकट, विकास मॉडल का संकट और रणनीतिक विश्वास का संकट।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संकट तब शुरू होता है जब नियमों का उल्लेख तो किया जाता है, लेकिन उनकी बाध्यकारी शक्ति कमजोर पड़ जाती है। उन्होंने कहा, "जब शक्ति ही अधिकार बन जाती है और शक्तिशाली देश कमजोर देशों पर हावी होने लगते हैं, तब छोटी और मध्यम शक्तियों पर पक्ष चुनने का दबाव बढ़ जाता है।"वैश्विक विकास के संदर्भ में उन्होंने आर्थिक विखंडन और बढ़ती असमानता को दीर्घकालिक स्थिरता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, "कई देशों के लिए विकास सुरक्षा से अलग नहीं है, बल्कि स्थायी सुरक्षा की आधारशिला है। जब विकास की प्रक्रिया बाधित होती है तो आर्थिक कमजोरी सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता में बदल सकती है।"रणनीतिक विश्वास को उन्होंने "मूक लेकिन खतरनाक संकट" करार देते हुए कहा कि विश्वास में कमी आने पर रक्षात्मक कदम भी उकसावे के रूप में देखे जाने लगते हैं और छोटी घटनाएं भी बड़े टकराव का कारण बन सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि नयी प्रौद्योगिकियां अवसरों के साथ-साथ जोखिम भी पैदा कर रही हैं। उनके अनुसार जब तकनीकी प्रगति नियमों और मानवीय निगरानी से आगे निकल जाती है तो रणनीतिक स्थिरता अधिक नाजुक हो जाती है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक तनावों का केंद्र होने के साथ-साथ समाधान का भी केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा, "यही कारण है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र को उन समाधानों का भी केंद्र बनना चाहिए जो इन चुनौतियों का सामना कर सकें।"श्री लाम ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन की केंद्रीय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि इसकी प्रासंगिकता केवल एकजुटता, रणनीतिक स्वायत्तता और साझा एजेंडा तय करने की क्षमता से ही कायम रह सकती है।
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय विवादों पर उन्होंने कहा कि वियतनाम सभी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्र विधि समझौते का पालन आवश्यक है। उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग के लिए छह प्रमुख दिशाओं का सुझाव दिया, जिनमें नियम-आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करना, मानव सुरक्षा, प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग, दुष्प्रचार से मुकाबला और निवारक कूटनीति को बढ़ावा देना शामिल है।
उन्होंने कहा कि आज अस्थिरता केवल सैन्य संघर्षों से नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया में उत्पन्न दरारों से भी पैदा हो रही है। दुष्प्रचार और सूचना युद्ध को गंभीर चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि गलत सूचना और सूचनाओं में हेरफेर राष्ट्रीय एकता को कमजोर कर सकते हैं, जनमानस को भ्रमित कर सकते हैं और समाज में विभाजन बढ़ा सकते हैं। उन्होंने क्षेत्रीय संकट-निवारण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि निवारक कूटनीति को संकट के बाद की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक क्षमता के रूप में देखा जाना चाहिए।
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