वेद प्रकाश दुबे सेदेवरिया, मई 02 -- पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य बिहार में गरीब तबके का मुख्य भोजन रहा बाटी-चोखा अब बदलते जमाने में शाही लोगों का पसंदीदा भोजन बनता जा रहा है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश जिले देवरिया, गोरखपुर, बलिया, मऊ, गाजीपुर,आजमगढ़, जौनपुर , वाराणसी बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज आदि जिलों समेत बिहार के जिले सीवान, छपरा, गोपालगंज, पश्चिम चम्पारण आदि जिलों में बाटी चोखा कभी गरीब लोगों का मुख्य भोजन हुआ करता था। बदलते जमाने में गरीबों का यह भोजन बड़े-बड़े लोगों का शाही भोजन बन गया है। अब तो बाटी चोखा शादी ब्याह और पाटिर्यों के साथ बड़े लोगों का शौकिया भोजन बनता जा रहा है।

गांव के गरीब लोग कण्डे को जलाकर उस पर बाटी चोखा बनाकर अपनी क्षुधा को शांत करते थे। चिकित्सकों के अनुसार बाटी चोखा स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहतर माना जाता है। क्योंकि इस भोजन में तेल मसाले का नाममात्र का प्रयोग होता है। वरिष्ठ पत्रकार एम पी विशारद ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चन्द्रशेखर बाटी चोखा के शौकीन थे। उन्होंने गरीबों के इस भोजन को पूर्वी उत्तर प्रदेश से ले जाकर देश की राजधानी दिल्ली तक बड़े-बड़े लोगों को इसका स्वाद चखाया था। पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस भोजन को चन्द्रशेखर ने दिल्ली में भी पहचान दिलवाई।

आज के समय में बाटी चोखा कोलकाता, दिल्ली, लखनऊ, पटना के साथ मुम्बई और गुजरात के अहमदाबाद में भी दुकानों पर आसानी से मिल जाया करता है। यह भोजन स्वास्थ्य के द्दष्टिकोण से भी हितकर माना जाता है।

देवरिया शहर में बाटी चोखा की करीब 30 से अधिक दुकाने खुली हैं, जहां लोग शौकिया तौर पर भोजन करते दिखाई पड़ते हैं। देवरिया में बाटी चोखा के दुकानदार दर्शन ने बताया, " हमारी दुकान पर गरीब से लेकर बड़े लोग बाटी चोखा खाने आते हैं। दिन में ऐसे लोग आते हैं जो कम पैसे में अपनी भूख शांत करते हैं, लेकिन रात के समय गरीब लोगों के साथ बड़े-बड़े शौकिया लोग आते हैं जो अपने दोस्तों के साथ आकर भोजन करते हैं।

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