नयी दिल्ली , जून 24 -- केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि कपड़ा क्षेत्र में जिला और राज्य योजनाओं को सक्रिय दृष्टिकोण से लागू करने का समय आ गया है।
श्री सिंह अपने मंत्रालय के दो दिवसीय वस्त्र शिखर सम्मेलन 2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उचित उत्पाद-बाजार मिश्रण, मूल्यवर्धन, स्थिरता और पर्यावरण मानकों का अनुपालन, मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने और विशिष्ट उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया।
समापन सत्र में वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने राज्यों, जिलों, उद्योग जगत के हितधारकों और निर्यात संवर्धन परिषदों से प्राप्त अनुशंसाओं को एक व्यापक राष्ट्रीय वस्त्र निर्यात रोडमैप में परिणत करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस क्षेत्र में उच्च मूल्य वाले उत्पाद खंडों, गुणवत्ता, नवाचार और स्थिरता को प्राथमिकता देगा, साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने और भारत के वैश्विक वस्त्र व्यापार में उपस्थिति को मजबूत करने के लिए मजबूत संस्थागत समन्वय का समर्थन करेगा।
सम्मेलन में केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में वस्त्र उद्योग से आग्रह किया कि वे हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाने के लिए जल्दी प्रयास करें ताकि अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके। उन्होंने निर्यातकों को एफटीए का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए जिला स्तर पर सूचना विषमता को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया और भारत सरकार द्वारा किए गए निर्यात प्रोत्साहन संबंधी विभिन्न उपायों पर प्रकाश डाला।
वाणिज्य सचिव ने "वस्त्र उद्योग के परिप्रेक्ष्य में- एफटीए का लाभ उठाना" पुस्तिका की सराहना करते हुए बताया कि वाणिज्य विभाग ने 500 कार्यशालाएँ आयोजित की हैं। इसके अलावा, उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से पुनर्जीवित जिला निर्यात केंद्र (डीईएच) कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया।
सम्मेलन के दूसरे और समापन दिवस की शुरुआत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों द्वारा समूह प्रस्तुतियों के साथ हुई।
दो दिवसीय आयोजन के दौरान आयोजित पांच प्रमुख सत्रों में से अंतिम दो सत्र संपन्न हुए। इनमें से पहला सत्र ' गुणवत्ता, स्थिरता प्रमाणन और सोर्सिंग निर्णय ' पर केंद्रित था, जिसमें व्यापक विचार-विमर्श किया गया। चर्चाओं में वैश्विक ब्रांड आवश्यकताओं को राज्य-स्तरीय क्लस्टर रणनीतियों में परिवर्तित करने, ट्रेसबिलिटी के लिए डिजिटल उत्पाद पासपोर्ट को बढ़ावा देने और वस्त्र क्षेत्र में चक्रीयता को आगे बढ़ाने के लिए क्लोज्ड-लूप रीसाइक्लिंग मार्गों की खोज पर प्रकाश डाला गया।
शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र का केंद्र बिंदु 'निर्यात प्रोत्साहन, मुक्त व्यापार समझौतों का उपयोग और बाजार विविधीकरण ' था, जिसमें भारत के वस्त्र निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया। सत्र में व्यापार करने में आसानी में सुधार, बाजार विविधीकरण, प्रमुख निवेशकों को आकर्षित करने और मानव निर्मित रेशों (एमएमएफ) पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए उत्पाद विविधीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
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