नयी दिल्ली , जून 11 -- केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को कहा कि 12 वर्षों में देश के कपड़ा और परिधान क्षेत्र ने प्रतिस्पर्धी, नवाचार-आधारित और रोजगार-गहन उद्योग के रूप में दुनिया में नयी पहचान बनायी है। इस क्षेत्र में इस दौरान रोजगार के अवसर दोगुना हुये हैं और इसमें करीब 50 फीसदी रोजगार महिलाओं को मिला है।
श्री सिंह ने यहां संवाददाता सम्मेलन में मोदी सरकार के दौरान कपड़ा और परिधान क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा देते हुये कहा कि प्रधानमंत्री के फाइव एफ विजन - फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन - से प्रेरित होकर देश का कपड़ा और परिधान क्षेत्र किसानों, निर्माताओं, बुनकरों, कारीगरों और निर्यातकों को जोड़ने वाली एक मजबूत और एकीकृत मूल्य श्रृंखला के रूप में विकसित हो गया है।
उन्होंने कहा कि भारत का कपड़ा उद्योग 2025-26 में बढ़कर लगभग 190 अरब अमेरिकी डॉलर का हो गया है और 2030 तक 350 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार है। घरेलू कपड़ा बाजार 2014-15 के लगभग छह लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। यह तेज वृद्धि कपड़ा और परिधान क्षेत्र के मजबूत विस्तार और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में वर्तमान में 5.3 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है और अगले तीन वर्षों में लगभग दो करोड़ अतिरिक्त रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। भारत में सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने के मामले में कृषि क्षेत्र के बाद इसी क्षेत्र का स्थान है।
श्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने पूरे कपड़ा इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक सुधारों और प्रमुख पहलों की एक श्रृंखला लागू की है। इनमें पीएम मित्र पार्क, उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, कपड़ा निर्यात संवर्धन मिशन, राष्ट्रीय फाइबर मिशन और कच्चा माल सहायता योजना शामिल हैं। इन योजनाओं से निवेश, तकनीकी प्रगति, स्थिरता और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिल रहा है।
कपास किसानों की सहायता करने और उद्योग के लिए कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने कपास उत्पादकता मिशन शुरू किया और कपास पर आयात शुल्क हटा दिया। आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी जैसी योजनाओं के माध्यम से निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया गया है। भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का दायरा 2014 में 19 देशों को कवर करने वाले 10 एफटीए से बढ़कर 56 देशों को कवर करने वाले 18 एफटीए का हो गया है। इससे भारत में कपड़ा व परिधान निर्यात के अवसर पैदा हुये हैं और इस क्षेत्र में निवेश की संभावनायें भी बढ़ी हैं। वैश्विक व्यापार की तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत के निर्यात गंतव्यों में विविधता आई है और 135 देशों में निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है।
उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी वस्त्रों में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है। इसका बाजार राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन के तहत लगभग छह अरब डॉलर से बढ़कर 25 अरब डॉलर हो गया है। अनुसंधान, नवाचार, इनक्यूबेशन और उद्योग-अकादमिक सहयोग में बड़े पैमाने पर किये जा रहे निवेश से भविष्य के लिए कपड़ा और परिधान उद्योग का इकोसिस्टम बनाने में मदद मिल रही है। प्रमुख राज्यों में एकीकृत कपड़ा पार्कों और सात पीएम मित्र पार्कों के विकास के माध्यम से कपड़ा बुनियादी ढांचे में भी महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गयी है। इस क्षेत्र ने करीब 70,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है। इतने बड़े पैमाने पर निवेश की वजह से रोजगार के करीब 21 लाख नये अवसरों का सर्जन होने की उम्मीद है।
पावरलूम क्षेत्र को तकनीक उन्नयन पहल से लाभ हुआ है। एनआईएफटी ने भी अपने शैक्षणिक पदचिह्न का विस्तार किया है और भारत के फैशन तथा डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए विज़ियोनेक्स्ट और इंडियासाइज़ जैसी नवीन परियोजनाएं शुरू की हैं।
श्री सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां भारत को एक कम लागत वाले उत्पादक से डिजाइन-आधारित, नवाचार-संचालित, टिकाऊ और निर्यात-उन्मुख वैश्विक कपड़ा केंद्र में बदलने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। कपड़ा राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने पिछले 12 वर्षों में कपड़ा क्षेत्र की उपलब्धियों पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों ने अभूतपूर्व विकास, सशक्तिकरण और बाजार एकीकरण देखा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। उन्नत करघों, कौशल विकास, बुनियादी ढांचा सहायता और बेहतर बाजार पहुंच की वजह से लाखों बुनकरों को लाभ हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम), इंडिया हैंडमेड पोर्टल, जीआई टैगिंग, मेगा हैंडलूम क्लस्टर और बुनकर मुद्रा योजना जैसी पहलों ने इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका को मजबूत किया है और बिचौलियों पर निर्भरता कम की है। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प क्षेत्र को क्लस्टर विकास, कौशल उन्नयन, कारीगर पहचान पत्र और विपणन पहलों के माध्यम से महत्वपूर्ण सहायता मिली है, जिससे कारीगरों को उत्पादकता और आय में सुधार करने में मदद मिली है। कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने कहा कि कपड़ा क्षेत्र एक प्रमुख कार्यबल और उभरते उद्यमियों के रूप में महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सचिव ने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर नीतिगत समर्थन, बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश प्रोत्साहन, कौशल वृद्धि और तकनीकी नवाचार के साथ, देश एक अग्रणी वैश्विक कपड़ा महाशक्ति बनने और विकसित भारत के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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