पटना , मार्च 20 -- बिहार में सारण जिले के गरखा प्रखंड स्थित रामपुर ग्राम पंचायत आज एक ऐसी मिसाल बन चुका है, जहां कचरा अब समस्या नहीं, बल्कि संपदा में बदल चुका है। कभी गंदगी और बदबू से जूझने वाला यह गांव अब स्वच्छता, जैविक खेती और स्थानीय रोजगार के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है। इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बना है - 'शक्तिमान' बायो कंपोस्ट।
करीब 12 हजार की आबादी और 15 वार्डों वाले इस पंचायत में कुछ साल पहले तक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब थी। घरों से निकलने वाला गीला और सूखा कचरा इधर-उधर फेंक दिया जाता था। नतीजतन गांव की गलियां कचरे के ढेर से पटी रहती थीं, जिससे न सिर्फ स्वच्छता प्रभावित होती थी, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ता था,लेकिन तस्वीर तब बदलनी शुरू हुई, जब स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत पंचायत में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर ठोस कदम उठाए गए। सबसे पहले घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू की गई। हर घर में डस्टबिन दिए गए और स्वच्छताकर्मियों की तैनाती की गई, जो नियमित रूप से कचरा इकट्ठा करते हैं। साथ ही लोगों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया गया।
इस पहल का अगला अहम कदम था पंचायत स्तर पर अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई की स्थापना। यहां एकत्रित कचरे की छंटाई कर गीले कचरे से 'नाडेप विधि' के जरिए जैविक खाद तैयार की जाने लगी। धीरे-धीरे यह प्रक्रिया इतनी सफल हुई कि यह खाद पंचायत की पहचान बन गई।
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