, Aug. 4 -- कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ आर. बी. दुबे ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों की वास्तविक शक्ति उनके वैज्ञानिक अनुसंधान तथा क्षेत्रीय कृषि समस्याओं के समाधान में निहित है। विश्वविद्यालयों के बीच संसाधनों, विशेषज्ञता एवं अनुभवों का साझा उपयोग किसानों के हित में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। उन्होंने सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ प्रताप सिंह ने कृषि शिक्षा को अधिक व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख बनाने पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को डिजिटल कृषि, जैविक खेती, कृषि प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं छात्र विनिमय कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।

कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ वी. एस. जेतावत ने पश्चिमी राजस्थान की शुष्क एवं अर्ध-शुष्क परिस्थितियों के अनुरूप सूखा सहनशील फसल किस्मों, जल संरक्षण तकनीकों तथा संरक्षित खेती पर संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई वहीं कोटा की कुलगुरु प्रोफेसर डॉ विमला डुकवाल ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को समय की मांग बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि होगी।

बैठक में परीक्षा प्रणाली एवं शैक्षणिक कैलेंडर में एकरूपता लाने पर विशेष चर्चा हुई। स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. कार्यक्रमों के लिए न्यूनतम समान शैक्षणिक मानक निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि राज्य के सभी कृषि विश्वविद्यालयों में डिग्रियों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। वित्तीय प्रबंधन के तहत खरीद प्रक्रिया, लेखा प्रणाली, परियोजना प्रबंधन तथा अनुदानों के उपयोग हेतु समान दिशा-निर्देश तैयार करने पर भी विचार किया गया। कुलगुरुओं ने माना कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा प्रशासनिक विलंब में कमी आएगी।

अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त शोध नेटवर्क विकसित करने का भी सुझाव दिया गया। इसके तहत फसल सुधार, बागवानी, पशुपालन, कृषि अभियांत्रिकी, जैव प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल कृषि जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिकों के बीच समन्वित अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, कौशल विकास कार्यक्रमों तथा उद्यमिता प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। कुलगुरुओं ने कहा कि कृषि स्नातकों को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला उद्यमी बनाना विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

बैठक के बाद कुलगुरुओं ने पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से 'मां के नाम एक पेड़' अभियान के तहत राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा परिसर में आम का पौधा रोपित किया तथा उसके संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया। उन्होंने विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों से भी अधिकाधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर एग्रोनॉमी विभाग में सेमिनार कक्ष का भी उद्घाटन किया गया। कुलगुरुओं ने सेमिनार कक्ष का अवलोकन करते हुए इसे शैक्षणिक गतिविधियों, वैज्ञानिक विमर्श, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अनुसंधान संबंधी आयोजनों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया।

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