नागपुर , जुलाई 02 -- महाराष्ट्र में कक्षा 6वीं की एक नयी मराठी पाठ्यपुस्तक शिक्षाविदों की आलोचनाओं के घेरे में आ गयी है। शिक्षाविदों का आरोप है कि इस पुस्तक में महाराष्ट्र की अपनी समृद्ध लोक परंपराओं की तुलना में अन्य राज्यों के लोक नृत्यों को अधिक प्रमुखता दी गयी है।
लोक नृत्यों पर आधारित इस अध्याय में पांच नृत्य शैलियों को शामिल किया गया है, जिनमें से केवल एक नृत्य दिंडी ही महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है। शेष चार नृत्यों में गुजरात का रास, पंजाब का भांगड़ा, छत्तीसगढ़ का किसानों का लोक नृत्य और बिहार का एक आदिवासी लोक नृत्य शामिल है।
आलोचकों का तर्क है कि महाराष्ट्र में लावणी, लेज़िम, धनगरी गाजा, गोंधल, कोली नृत्य और पोवाड़ा सहित एक विविध और जीवंत लोक नृत्य विरासत है। उन्होंने कहा कि छात्रों को अन्य राज्यों के लोक नृत्यों से परिचित कराने से पहले इन स्थानीय परंपराओं का व्यापक परिचय दिया जाना चाहिए।
पुस्तक की प्रकाशक बालभारती की निदेशक अनुराधा ओक ने इस आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह पाठ्यपुस्तक शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गयी थी और इस अध्याय को प्रसिद्ध मराठी लोक साहित्य लेखिका सरोजिनी बाबर ने लिखा है।
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