दरभंगा , मई 09 -- जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू-कश्मीर में तुलनात्मक धर्म एवं सभ्यता केन्द्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास सिंह ने शनिवार को कहा कि कंप्यूटर के माध्यम से संस्कृत के ज्ञान-विज्ञान के संरक्षण से हमारी प्राचीन ज्ञान-परंपरा सुरक्षित एवं विस्तृत होगी।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग द्वारा "संस्कृत भाषा एवं कंप्यूटर" विषय पर शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित करते हुए डॉ. विकास सिंह ने कहा कि संस्कृत सूत्रों के भाव गागर में सागर सदृश हैं। पाणिनि के अष्टाध्यायी में करीब 4000 सूत्र हैं जो कंप्यूटर के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा की विशेषताएं कंप्यूटर साइंस के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत में एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, जिनमें 30 प्रतिशत मिथिला क्षेत्र से हैं। मिथिला ज्ञान, दर्शन की धरती रही है। यदि कंप्यूटर साइंस के माध्यम से संस्कृत के ज्ञान-विज्ञान का संरक्षण किया जाए तो हमारी प्राचीन ज्ञान-परंपरा संरक्षित एवं विस्तृत होगी। आज भारत सहित पूरे विश्व में संस्कृत और कंप्यूटर पर व्यापक विमर्श चल रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 एवं पीजी के सिलेबस की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें भी संस्कृत और कंप्यूटर के महत्त्वों को रेखांकित किया गया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत का आधुनिक दौर आ गया है। एआई के लिए भी संस्कृत विशिष्ट भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हो रही है।
विषय प्रवेश करते हुए डॉ. आर एन चौरसिया ने कहा कि संस्कृत भाषा और कंप्यूटर में गहरा संबंध है। कंप्यूटर साइंस संस्कृत-अध्ययन को डिजिटल रूप प्रदान कर रहा है। संस्कृत की व्याकरणिक संरचना इतनी स्पष्ट और तार्किक है कि यह कंप्यूटर के लिए अत्यंत उपयुक्त भाषा सिद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की अत्यंत प्राचीन, वैज्ञानिक, समृद्ध एवं व्यवस्थित भाषा है, जिसके व्याकरणिक नियम संक्षिप्त सूत्रों में निबंद्ध हैं जो कंप्यूटर एल्गोरिद्म से मिलती-जुलती है। संस्कृत साहित्य का डिजिटल रूप भविष्य के लिए ज्ञान-संरक्षण का माध्यम बन रहा है। यह केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा ही नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान एवं कंप्यूटर युग में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इसकी वैज्ञानिकता, तार्किकता तथा व्याकरणिक शुद्धता कंप्यूटर के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
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