दावणगेरे , मई 02 -- केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शनिवार को केंद्र सरकार की ईंधन मूल्य निर्धारण नीति का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा दबाव और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय बोझ के कारण वाणिज्यिक एलपीजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी अपरिहार्य हो गई थी।
विपक्ष द्वारा ईंधन मूल्य वृद्धि पर की जा रही आलोचना के बीच श्री जोशी ने कहा कि भारत की एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, जिससे देश वैश्विक बाजार की अस्थिरता से सीधे प्रभावित होता है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमारी एलपीजी निर्भरता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात पर आधारित है। यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है।"उनका संकेत वाणिज्यिक एलपीजी कीमतों में की गई वृद्धि की ओर था।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए श्री जोशी ने कहा कि विपक्ष को आलोचना करने से पहले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के दौर में ईंधन संकट के समय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली के बयानों को याद करना चाहिए।
उन्होंने कहा, "वर्तमान संकट कहीं अधिक गंभीर है। कांग्रेस नेताओं को आलोचना करने से पहले यह याद करना चाहिए कि उस समय उन्होंने खुद क्या कहा था।"भाजपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट का पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।
श्री जोशी ने दावा किया कि इसके बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार ने घरेलू एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और पाइप्ड नेचुरल गैस की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा है।
तेल विपणन कंपनियों की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के कारण सरकारी कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है।
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