हैदराबाद , मार्च 20 -- ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के बारे में चिंता जताते हुए उनकी सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री ओवैसी रमजान के आखिरी जुमे के अवसर पर ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में 'जलसा यौम-उल-कुरान' के दौरान एक विशाल सभा को संबोधित कर रहे थे, जहाँ उन्होंने वैश्विक तनाव, खाड़ी देशों में भारतीयों के कल्याण और घरेलू सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपने संबोधन में मौजूदा अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव का जिक्र किया और प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भारत तटस्थ रुख बनाए रखता है, तो वैश्विक स्तर पर उसकी आवाज का अधिक महत्व होगा।

एआईएमआईएम नेता ने खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों के बारे में भी चिंता जताई और उल्लेख किया कि लगभग एक करोड़ भारतीय देश के विदेशी मुद्रा भेजने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उनकी सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।

आर्थिक मुद्दों पर श्री ओवैसी ने भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व की सीमाओं की ओर इशारा किया और फल तथा बासमती चावल जैसे उत्पादों के निर्यात में व्यवधान पर चिंता जताई। उन्होंने विशिष्ट समुदायों को निशाना बनाकर किए जाने वाले आर्थिक बहिष्कार के आह्वान की भी आलोचना की।

हाल की घटनाओं की निंदा करते हुए श्री ओवैसी ने गंगा में नाव पर रोजा खोलने के लिए व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों के विरोध में बात की और ऐसी कार्रवाइयों को भेदभावपूर्ण बताते हुए कानून के तहत समान व्यवहार की मांग की। उन्होंने शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी पर भी चिंता जताई और पशु एवं भैंसों के परिवहन को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधों पर सवाल उठाए। दिल्ली के घटनाक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को धार्मिक प्रथाओं के स्वतंत्र पालन के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

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