नयी दिल्ली , मार्च 26 -- वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद और केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) स्थायी आधारभूत ढांचा और चक्रीय (सर्कुलर) अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सड़क निर्माण में अपशिष्ट फाउंड्री रेत (डब्ल्यूएफएस) के प्रभावी उपयोग के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है।

भारतीय फाउंड्रीमैन संस्थान (आईआईएफ) ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सीएसआईआर-सीआरआरआई और सुयोग एलिमेंट्स के साथ गुरुवार को यहां एक सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) समझौता हुआ। इस अवसर पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाइसेल्वी मौजूद थी। इस साझेदारी का उद्देश्य कोयंबटूर क्लस्टर के डब्ल्यूएफएस (वर्किंग स्ट्रक्चरल स्ट्रक्चर) यानी किसी भी निर्माण का वह ढांचा, जो भार को सहन करने के लिए तैयार किया गया हो उसके सड़क अवसंरचना में उपयोग के लिए नवीन, टिकाऊ और व्यापक समाधान विकसित करना तथा उन्हें सुगम बनाना है।

इस अवसर पर डॉ. कलाइसेल्वी ने बताया कि सड़क निर्माण में अपशिष्ट फाउंड्री रेत जैसे औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग सतत विकास और चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रति सीएसआईआर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तरह की सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास पहल अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधनों में बदलने में मदद करेगी और साथ ही राष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि धातु ढलाई उद्योग का उप-उत्पाद, अपशिष्ट फाउंड्री रेत, बड़े पैमाने पर उत्पादन और निपटान की आवश्यकताओं के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां पैदा करता है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में इस सामग्री का उपयोग संसाधन दक्षता, अपशिष्ट न्यूनीकरण और सतत विकास पर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. चौधरी रवि शेखर ने कहा कि सीएसआईआर-सीआरआरआई टिकाऊ और नवोन्मेषी सड़क प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी रहा है। अपशिष्ट फाउंड्री रेत का उपयोग औद्योगिक उप-उत्पादों को मूल्यवान निर्माण सामग्री में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर आईआईएफ के अध्यक्ष सुशील शर्मा ने बताया कि "कोयंबटूर फाउंड्री क्लस्टर भारत का सबसे बड़ा फाउंड्री क्लस्टर है, जिसमें लगभग 800-1000 फाउंड्री इकाइयां शामिल हैं, जो विभिन्न घरेलू क्षेत्रों और निर्यात बाजारों को ढलाई की आपूर्ति करती हैं।

सीआरआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक और फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख सतीश पांडे ने बताया कि इस सहयोग का उद्देश्य एक संरचित अनुसंधान कार्यक्रम तैयार करना है, जिसमें ग्रीन सैंड और रेजिन बॉन्डेड सैंड सहित विभिन्न प्रकार की फाउंड्री सैंड का विश्लेषण करना और सड़क निर्माण के लिए उपयुक्त अनुकूलित प्रसंस्करण और उपयोग प्रोटोकॉल विकसित करना शामिल है। श्री सतीश पांडे इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं।

इस अवसर पर सीआरआरआई के मुख्य वैज्ञानिक और टीएमबीडी प्रमुख डॉ. विनोद करार ने बताया कि इस सहयोगात्मक परियोजना के तहत, सीएसआईआर-सीआरआरआई तकनीकी विशेषज्ञता और वैज्ञानिक सत्यापन प्रदान करेगा, जबकि आईआईएफ उद्योग तक पहुंच और ज्ञान प्रसार में सहायता करेगा। सुयोग एलिमेंट्स विकसित प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन और विस्तार में योगदान देगा।

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