नयी दिल्ली , मार्च 11 -- लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिये लाया गया विपक्ष का संकल्प बुधवार को ध्वनि मत से गिर गया।

कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद जावेद तथा कुछ अन्य ने श्री बिरला पर पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए बजट सत्र के पहले चरण के दौरान उन्हें पद से हटाने का संकल्प दिया था जो सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन नौ मार्च की कार्यसूची में शामिल था लेकिन उस दिन इसे पेश किया गया। मंगलवार को पेश किए जाने के साथ इस पर दो दिन चर्चा हुई और सदन ने आज संकल्प को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। संकल्प पर 42 से अधिक सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया।

चर्चा के अंत में गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी सदस्यों को सदन में बोलने नहीं देने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि श्री बिरला सदन का संचालन सबके साथ समान भाव से करते हैं और उनकी नैतिकता पर विपक्ष सवाल नहीं उठा सकता। उनका कहना था कि इतिहास में तीन संकल्प अध्यक्ष को हटाने के लिए लोकसभा में आये हैं लेकिन संकल्प के निपटान तक सदन में नहीं आने की नैतिकता का परिचय सिर्फ श्री बिरला ने ही दिया है। पहले अध्यक्ष प्रस्ताव आने के बाद भी सदन की कार्यवाही का संचालन करते रहे हैं लेकिन श्री बिरला ने संकल्प दिये जाने के साथ ही नैतिक आधार पर यह घोषणा कर दी थी कि वह संकल्प पर चर्चा होने तक वह सदन का संचालन नहीं करेंगे।

श्री बिरला के खिलाफ लाये गये संकल्प में आरोप लगाया गया था कि वह सदन में विपक्ष के नेता तथा अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं देते हैं। उन्होंने विपक्ष की महिला सांसदों पर निराधार आरोप लगाये। उन्होंने लोक हित के मुद्दे उठाने पर विपक्ष के सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया तथा वह पूर्व प्रधानमंत्रियों के विरुद्ध आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियाँ करने से सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को रोकते नहीं हैं। इस तरह वह अपने पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण से सभा के सदस्यों के अधिकारों की अवहेलना करते हैं और ऐसी घोषणाएं करते हैं और निर्णय लेते हैं जो अधिकारों को प्रभावित और कमजोर करते हैं। इसमें यह आरोप भी लगाया गया था कि वह सभी विवादास्पद मामलों में सत्तारूढ़ दल के दृष्टिकोण का खुलकर समर्थन करते हैं। उनकी ये बातें सभा के संचालन तथा सदन में लोगों की चिंताओं और शिकायतों को व्यक्त करने के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं इसलिए उन्हें उनके पद से हटाया जाना चाहिए।

संकल्प पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने श्री बिरला पर सदन की कार्यवाही में सत्तारूढ दल के सदस्यों के साथ नरमी बरतने और पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया लेकिन श्री शाह ने इन सब आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि श्री बिरला अत्यंत शिष्टाचार, सबके साथ समान व्यवहार, नियमों का पालन करते हुए पारदर्शी तरीके तथा निष्ठापूर्वक सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं। उनका कहना था कि श्री बिरला की निष्ठा पर सवाल निंदनीय है और अध्यक्ष के खिलाफ इस तरह से प्रस्ताव लाना गरिमा तथा प्रतिष्ठा के खिलाफ है।

श्री शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि वह सदन में नहीं आते हैं और कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेते हैं और विदेश में जाकर देश की बुराई करते हैं। इसी बीच विपक्षी दलों के सदस्यों ने श्री शाह पर असंसदीय शब्द के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए सदन में भारी हंगामा शुरु कर दिया और अब तक हल्की टोकाटाकी के बीच श्री शाह का भाषण सुन रहे विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गये। वे नारेबाजी करते हुए श्री शाह से माफी मांगने की मांग करने लगे।

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