बैतूल , जुलाई 25 -- मध्य प्रदेश में एक ओर जहां अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को लेकर लगातार राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है, वहीं दूसरी ओर बैतूल जिले में ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की भारी कमी सामने आई है। जिले में हजारों जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए वर्तमान में केवल दो ओबीसी छात्रावास संचालित हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई करने या आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा बीच में छोड़ने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के विद्यार्थियों के लिए कुल 136 छात्रावास, आश्रम और क्रीड़ा परिसर संचालित हैं। इनमें एसटी वर्ग के लिए 71 छात्रावास, एससी वर्ग के लिए 21 छात्रावास, जूनियर स्तर के 42 आश्रम तथा दो क्रीड़ा परिसर शामिल हैं। इन संस्थानों में कुल 7,490 सीटें उपलब्ध हैं, जिनका लाभ हजारों विद्यार्थी उठा रहे हैं।
इसके विपरीत ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जिले में केवल दो छात्रावास ही उपलब्ध हैं। इनमें एक छात्रावास की क्षमता 50 और दूसरे की 100 सीटों की है। कुल 150 सीटों के सहारे पूरे जिले के विद्यार्थियों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों से उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों को उठानी पड़ रही है।
शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में ऐसे ओबीसी परिवार हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। वे निजी हॉस्टल या शहरों में महंगे किराये के मकानों का खर्च वहन नहीं कर सकते। छात्रावास की सुविधा नहीं मिलने के कारण कई मेधावी विद्यार्थी पढ़ाई बीच में छोड़ने या कम संसाधनों में शिक्षा जारी रखने को मजबूर हैं।
बताया गया कि इस समस्या को देखते हुए पिछड़ा वर्ग विभाग ने करीब दो वर्ष पहले जिले के प्रत्येक विकासखंड में दो-दो छात्रावास स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। जिले में कुल 10 नए छात्रावासों के प्रस्ताव भेजे गए थे। इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने पर ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों की संख्या बढ़कर 20 हो जाती और सैकड़ों विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा मिल सकती थी। हालांकि दो वर्ष बीत जाने के बावजूद इन प्रस्तावों पर अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराने की बात करती है लेकिन छात्रावास जैसी मूलभूत सुविधा के मामले में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए संसाधनों का गंभीर अभाव दिखाई देता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते नए छात्रावासों को मंजूरी नहीं मिली तो हर वर्ष बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित होते रहेंगे।
जिले के सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने शासन से लंबित प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति देने तथा प्रत्येक विकासखंड में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास स्थापित करने की मांग की है, ताकि आर्थिक कमजोरी किसी भी छात्र की शिक्षा में बाधा न बने।
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