जयपुर , अप्रैल 19 -- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा है कि कांग्रेस और समस्त विपक्ष ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की शर्तों से सहमत नहीं होते हुए भी मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए महिला आरक्षण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कराया लेकिन इस बार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण नहीं देने की मंशा तथा मनमर्जी का परिसीमन करने के उद्देश्य से 131वां संविधान संशोधन विधेयक संसद में पेश किया गया, जिसे समर्थन नहीं मिला।

श्री डोटासरा ने रविवार को यहां प्रेस वार्ता में यह आरोप लगाते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि देश की संसद में 22 सितम्बर 2023 को महिलाआरक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित हुआ। उस समय इण्डिया गठबंधन ने मांग रखी थी कि इस विधेयक में केवल 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए हो और इसे परिसीमन तथा जनगणना से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्र के नाम सम्बोधन कर और लोकसभा में जिस प्रकार अपना वक्तव्य दे रहे हैं और निराशा व्यक्त कर रहे है, उन्होंने कभी किसी से विधेयक पर समर्थन नहीं मांगा था। कांग्रेस पार्टी ने पहले 1996 में महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश किया था और उसके पश्चात् 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पारित किया था। उस समय भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और इनके सहयोगी दलों ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था।

श्री डोटासरा ने कहा कि महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद भाजपा ने राजनीतिक लाभ लिए और 2024 के चुनावों में पुन: सत्ता में आ गए। जनगणना 2021 में होनी थी वह भाजपा सरकार ने नहीं करवायी और महिला आरक्षण बिल पारित होने के तीन वर्ष तक भाजपा की केन्द्र सरकार ने महिला आरक्षण के कानून को लागू करने के लिए गजट नोटिफिकेशन नहीं निकाला लेकिन पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडू के राज्यों की विधानसभा चुनाव के चलते षड्यंत्र के तहत् संसद का सत्र बुला लिया।

उन्होंने कहा कि दो षड्यंत्र भाजपा ने रचे जिसमें देश की संसद की सीटों का मनमानी तरीके से ऐसा परिसीमन करें जिससे भाजपा को लम्बे समय तक सत्ता में बने रहने का लाभ मिले, दूसरा षड्यंत्र महिला आरक्षण के नाम पर अधिक से अधिक राजनीतिक लाभ चुनावों में लेने का था। भाजपा ने संशोधन बिल परिसीमन के लिए पेश किया और वो भी उपलब्ध संसाधन जो कि 2011 की जनगणना के आंकड़े है उसके आधार पर भाजपा सरकार को परिसीमन करने की छूट मिल जाए, बहुमत के आधार पर संसद से ही परिसीमन हो जाए।

उन्होंने कहा कि यह भाजपा की राजनैतिक साजिश थी उन्हें जवाब देना चाहिए कि यदि ऐसा संशोधन आज लाये तो इन शर्तों को 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित करते समय अधिनियम का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया। जबकि 2011 की जनगणना के आंकड़े उससमय भी सरकार के पास उपलब्ध थे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े द्वारा जनसमर्थन से बनाए गए दबाव के कारण श्री मोदी ने जातिगत जनगणना की घोषणा की थी उसके बावजूद दो वर्ष तक जनगणना शुरू नहीं की और अब जब जातिगत जनगणना प्रारम्भ हो चुकी है तब भाजपा को यह आभास हो गया है कि इस जनगणना के पश्चात् ओबीसी को आरक्षण आवश्यक रूप से देना होगा।

श्री डोटासराने कहा कि ऐसे में केन्द्र सरकार ने ओबीसी को आरक्षण नहीं देने की मंशा से तथा मनमर्जी का परिसीमन करने के उद्देश्य से 131वां संविधान संशोधन संसद में पेश किया ताकि 2011 की जनगणना और मनमर्जी से परिसीमन कर बनायी गयी 850 सीटें हो जाएं और वो भी साधारण बहुमत के आधार पर यह निर्णय संसद से हो जाएं यही भाजपा की मंशा थी।

उन्होंने भाजपा पर लोगों को केवल भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सवालों के जवाब नहीं दे रही है, राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी प्रेस वार्ता में सवाल नहीं लिए। महिलाओं के सशक्तिकरण की बात भाजपा कर रही है किन्तु भाजपा ने आज तक महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष तक नहीं बनाया है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित