अबू धाबी , मई 16 -- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के ऊर्जा और बुनियादी ढांचा मंत्री सुहैल अल-मजरूई ने तेल निर्यातक देशों के संगठन 'ओपेक' और 'ओपेक प्लस' से बाहर निकलने के देश के फैसले का खुलासा किया है।
श्री मजरूई ने स्पष्ट किया कि संगठन छोड़ना यूएई का रणनीतिक विकल्प है, जो पूरी तरह से देश के राष्ट्रीय हितों और आर्थिक दृष्टिकोण पर आधारित है।
सोशल मीडिया पर शनिवार को मंत्री ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की, जो पिछले कुछ दिनों से फिजा में तिर रहे थे कि राजनीतिक मतभेदों की वजह से यूएई ने इन संगठनों को छोड़ा है।
मंत्री ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि यह निर्णय यूएई की भविष्य की तेल उत्पादन क्षमताओं और राष्ट्रीय उत्पादन नीति के व्यापक मूल्यांकन के बाद लिया गया था। उन्होंने साफ किया कि ओपेक से बाहर निकलने का उद्देश्य अपनी ऊर्जा क्षमताओं का विस्तार करना और एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करना है।
श्री मजरूई के अनुसार, यह कदम यूएई के उस दीर्घकालिक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपनी ऊर्जा नीतियों को वैश्विक बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप ढालना चाहता है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यूएई का यह फैसला किसी राजनीतिक गुटबाजी या अपने पुराने साझेदारों के साथ किसी भी प्रकार के विभाजन का परिणाम नहीं है। उन्होंने कहा कि यूएई के निर्णय संप्रभु होते हैं और वे केवल अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं से प्रेरित होते हैं, न कि बाहरी अटकलों या भ्रामक विमर्श से।
गौरतलब है कि यूएई के संगठन छोड़ने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके कारणों को लेकर कई तरह के कयास लगाये जा रहे थे। मंत्री के इस ताजा बयान का उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि यूएई अब भी वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बाजार की स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अब वह अपनी तेल नीतियों को संगठन के बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से संचालित करना चाहता है।
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