भुवनेश्वर , सितंबर 08 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने ओडिशा मोटर वाहन विभाग के कांस्टेबल आशुतोष मृदंगिया की मौत की जांच अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को सौंपने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि कांस्टेबल आशुतोष की मृत्यु से पहले दिए गए बयानों के मद्देनजर उनकी पत्नी और साले की कथित संलिप्तता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने इसी के मद्देनजर मामले की जांच अपराध शाख-सीआईडी को सौंपने का आदेश दिया है। यह निर्देश आशुतोष की बहन निवेदिता देवी द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने निष्पक्ष जांच और प्राथमिकी में नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
यह आदेश आशुतोष की बहन निवेदिता की याचिका पर दिया गया है। उन्होंने मामले की सही तरीके से जांच करने और प्राथमिकी में नाम वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
आशुतोष को पांच जून को टाउन थाना क्षेत्र की बिजीपुर पुलिस कॉलोनी से गंभीर हालत में बचाया गया था। बाद में बहरामपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में उनके मृत्यु पूर्व दिये गये दो बयान दर्ज किए गए थे, जिनमें उन्होंने कथित तौर पर हमले के सिलसिले में अपनी पत्नी और साले का नाम लिया था।
राज्य सरकार ने 26 अगस्त को अदालत में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा कि जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कथित घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिल सका और भुवनेश्वर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में आरोपियों का पॉलीग्राफ परीक्षण कराया गया, जिसमें कोई प्रतिकूल निष्कर्ष सामने नहीं आया।
याचिकाकर्ता के वकील ने हालांकि आरोप लगाया कि मृत्यु पूर्व बयानों और अन्य साक्ष्यों के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने जांच की निष्पक्षता को लेकर भी आशंका जताई।
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी सबूतों के आधार पर होती है। हालांकि, कोर्ट ने माना कि दो बयानों को देखते हुए आरोपियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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