भुवनेश्वर , मई 02 -- ओडिशा सरकार ने श्रमिकों की दैनिक मज़दूरी में बढ़ोत्तरी की घोषणा की है। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर लिया गया और यह एक अप्रैल से लागू होने वाले मंहगाई भत्ता (वीडीए) में बढ़ोतरी के साथ लागू होगी।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को भुवनेश्वर में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के राज्य-स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। संशोधित मज़दूरी से अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़कर 472 रुपये, अर्ध-कुशल श्रमिकों की 522 रुपये, कुशल श्रमिकों की 572 रुपये और अत्यधिक कुशल श्रमिकों की 622 रुपये हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वैरिएबल डियरनेस अलाउंस (वीडीए) में 10 रुपये की बढ़ोतरी एक अप्रैल से लागू की जाएगी।

श्री माझी ने श्रमिक कल्याण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए कहा कि 2025-26 वित्तीय वर्ष के दौरान ओडिशा भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के तहत पांच लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों का नया पंजीकरण किया गया है, और अब तक 541 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता वितरित की जा चुकी है। पूरे राज्य में 6,000 श्रमिकों को पहचान पत्र वितरित किए गए, साथ ही शिक्षा, विवाह और मृत्यु लाभों को कवर करते हुए 150 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई। उन्होंने श्रमिकों के योगदान को सम्मान देते हुए कहा कि मज़दूर ही मानव सभ्यता के सच्चे निर्माता हैं और उनके अथक प्रयास ही राज्य और राष्ट्र दोनों की प्रगति को आगे बढ़ाते हैं। श्री माझी ने सभी श्रमिकों के लिए उचित मज़दूरी, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल पर सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

श्री माझी ने रोज़गार सृजन पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि ज़िलों में बढ़ते औद्योगीकरण और कौशल विकास से संकटपूर्ण पलायन की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि विपरीत पलायन पहले ही शुरू हो चुका है, जिसमें श्रमिक तिरुपुर और कोयंबटूर जैसे स्थानों से लौटकर ओडिशा के कपड़ा क्षेत्र में रोज़गार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "पिछले 22 महीनों में, लगभग 92,000 युवाओं को निजी क्षेत्र में रोज़गार मिला है, जिनमें लगभग 10,000 ऐसे युवा शामिल हैं जो अन्य राज्यों से लौटे हैं।"विपक्ष के नेता और बीजू जनता दल (बीजद) अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कल इससे पहले बढ़ती महंगाई और मौजूदा बाज़ार स्थितियों का हवाला देते हुए, ओडिशा में श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाकर 800 रुपये करने की मांग रखी।

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