भुवनेश्वर , जुलाई 08 -- ओडिशा सरकार ने अपने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में पूरी तरह से कागज रहित और नकदी रहित व्यवस्था लागू कर भूमि पंजीकरण सेवाओं को डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने प्रस्तावित सुधारों की समीक्षा करते हुए कहा कि नयी व्यवस्था से पंजीकरण प्रक्रिया पारदर्शी और जनता के अनुकूल बनेगी। इसके साथ ही कार्यालयों में लोगों की सीधी आवाजाही कम होने और नकदी का लेन-देन खत्म होने से यह प्रक्रिया पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि जमीन का सौदा पक्का होने के बाद अब खरीदारों और विक्रेताओं को आवेदन जमा करने के लिए रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके बजाय पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाएगी। दोनों पक्षों को केवल पहचान सत्यापन और कानूनी तौर पर दस्तावेज निष्पादन के लिए ही रजिस्ट्री अधिकारी के सामने पेश होना होगा।

सरकार ने पंजीकरण से जुड़े शुल्कों के लिए 15,000 रुपये तक के नकद भुगतान की मौजूदा व्यवस्था को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब सभी भुगतान केवल डिजिटल माध्यमों से ही किये जाएंगे, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

इस कागज रहित व्यवस्था के तहत आवेदकों को खरीदार और विक्रेता के पहचान पत्र, भूखंड का विवरण, भार-मुक्त प्रमाणपत्र (ईसी) और अन्य जरूरी दस्तावेजों सहित सभी अनिवार्य कागजात ऑनलाइन अपलोड करने होंगे। उम्मीद है कि इस डिजिटल कार्यप्रणाली से कागजी कार्रवाई कम होगी, काम तेजी से होगा और प्रक्रिया में होने वाली देरी से बचा जा सकेगा।

पारदर्शिता को और मजबूत करने तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसके तहत पंजीकरण दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन राज्य के किसी भी रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा किया जा सकेगा, न कि केवल उसी कार्यालय द्वारा जहां जमीन की रजिस्ट्री होनी है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि केवल पंजीकृत (डीड राइटर) या अधिवक्ताओं को ही पंजीकरण दस्तावेज तैयार करने और जमा करने का अधिकार होगा। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के दौरान उनका विवरण देना अनिवार्य होगा। पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल होने वाले अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं को भी विभाग में अपना पंजीकरण कराना होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस नयी पंजीकरण व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए जल्द से जल्द एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर अधिसूचित की जाये।

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