भुवनेश्वर , जुलाई 23 -- ओडिशा सरकार ने शहरी अवसंरचना विकास परियोजनाओं में तेज़ी लाने एवं प्रक्रिया में लगने वाले विलंब को खत्म करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय शक्तियों में बढ़ोतरी की है।

आवास एवं शहरी विकास विभाग ने वित्तीय शक्तियों के सौंपे जाने के बारे में संशोधित आदेश जारी किया है जो तुरंत लागू हो गया है और यह पहले के सभी आदेशों, सूचनाओं एवं ज्ञापनों की जगह लेगा। इस सुधार की एक मुख्य विशेषता भुवनेश्वर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (बीएससीएल) और राउरकेला स्मार्ट सिटी लिमिटेड (आरएससीएल) के प्रबंध निदेशकों को वित्तीय अधिकारों के मामले में नगर निगम के आयुक्त के बराबर का दर्जा देने का निर्णय है।

नए नियमों के अंतर्गत, नगर निगम आयुक्त अब काम, खरीद और ऑफिस के खर्चों के लिए एक करोड़ रुपये तक भुगतान की मंज़ूरी दे सकते हैं। भुवनेश्वर नगर निगम में पहले यह सीमा 50 लाख रुपये थी जिसे अब दोगुना कर दिया गया है और दूसरे नगर निगमों में यह सीमा 15 लाख रुपये थी जिसे लगभग सात गुना बढ़ा दिया गया है।

सरकार ने कामों एवं परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक मंज़ूरी देने की वित्तीय सीमा भी दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये कर दी है जिससे ज़्यादा लागत वाली विकास परियोजना को तीव्रता से मंज़ूरी प्राप्त हो सकेगी। तीन करोड़ रुपये से ज़्यादा और चार करोड़ रुपये तक की लागत वाले कामों को अनुबंधों पर स्थायी समिति मंज़ूरी देगी, चार करोड़ से पांच करोड़ रुपये के बीच के कामों को नगर निगम मंज़ूरी देगा, जबकि पांच करोड़ रुपये से ज़्यादा लागत वाली परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक विभाग की मंज़ूरी की आवश्यकता होगी।

नगरपालिकाओं और अधिसूचित क्षेत्र परिषदों के लिए, कार्यकारी अधिकारियों की भुगतान क्षमता 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गयी है। 20 लाख रुपये से अधिक के बिल के लिए कार्यकारी अधिकारी और अध्यक्ष दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। कार्यकारी अधिकारियों को सभी वेतन एवं पेंशन स्वीकृत करने का अधिकार भी दिया गया है।

नगरपालिकाओं और एनएसी में कार्यों एवं परियोजनाओं की प्रशासनिक मंजूरी की सीमा भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। बीस लाख रुपये से ज्यादा और तीन करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को नगरपालिका या एनएसी परिषद द्वारा मंजूरी दी जाएगी जबकि तीन करोड़ रुपये से अधिक प्रस्तावों के लिए प्रशासनिक विभाग की मंजूरी आवश्यक होगी।

संशोधित वित्तीय अधिकारों के हस्तांतरण से शहरी स्थानीय संस्थाओं की संचालनात्मक स्वायत्तता में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, प्रक्रियात्मक देरी कम होगी और अवसंरचना एवं सार्वजनिक सेवा परियोजनाओं को पूरा करने की रफ्तार में सुधार होगा, जिससे राज्य की कुशल, उत्तरदायी एवं जवाबदेह शहरी शासन की पहल मजबूत होगी।

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