भुवनेश्वर , जुलाई 10 -- ओडिशा राजस्व बोर्ड ने जटनी तहसीलदार को एक विवादित जमीन के मौजूदा अधिकार अभिलेख (आरओआर) को भगवान जगन्नाथ के नाम पर बहाल करने का आदेश जारी किया है।
बोर्ड के सदस्य सत्यब्रत साहू ने लंबे समय से लंबित दो पुनरीक्षण याचिकाओं को मंजूरी देते हुए फैसला सुनाया कि एक अमान्य लीज (पट्टे) के आधार पर तैयार किया गया मौजूदा आरओआर कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं है और इसे तुरंत ठीक करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि यह विवाद खुर्दा जिले की जटनी तहसील के कुडियारी मौजा में 'एखराजत महल एस्टेट' के तहत आने वाली जमीन के एक बड़े हिस्से से जुड़ा है और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने 1951 में एक औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए दी गई लंबी अवधि की लीज को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह लीज कानूनी रूप से अमान्य थी क्योंकि इसमें 'बंदोबस्ती आयुक्त' की जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी।
विवादित लीज के आधार पर बाद में यह जमीन निजी व्यक्तियों (जैसे नीलमणि दुबे और अन्य) और 'गोपबंधु ग्लास एंड पॉटरी वर्क्स लिमिटेड' के नाम पर दर्ज कर दी गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उस समय लागू 'ओडिशा हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियम, 1939' की धारा 58 के तहत मंदिर की अचल संपत्ति की पांच साल से अधिक की किसी भी लीज के लिए बंदोबस्ती आयुक्त की पूर्व मंजूरी जरूरी थी। दूसरी पार्टी हालांकि ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाई जिससे यह साबित हो सके कि ऐसी मंजूरी ली गई थी।
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