नयी दिल्ली , अगस्त 01 -- ओडिशा सरकार ने 'कैच द रेन 2026' अभियान के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जलाशयों के जीर्णोद्धार और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयास तेज कर दिए हैं। राज्य में अब तक 905 वर्षा जल संचयन एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि सभी 30 जिलों में 98 तालाबों के जीर्णोद्धार और गाद हटाने का कार्य भी शुरू किया गया है।
अधिकारिक सूचना के अनुसार अभियान के तहत राज्य में 968 सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें नुक्कड़ नाटक, लोक कार्यक्रम, सामुदायिक संवाद और वर्षा जल संचयन पर जागरूकता अभियान शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 230 गतिविधियां खाेरदा जिले में आयोजित की गईं, जबकि अंगुल में 124 तथा कटक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, नबरंगपुर और सुबर्णपुर में 62-62 कार्यक्रम हुए। मयूरभंज में 60, नयागढ़ और पुरी में 50-50 तथा गंजम में 20 गतिविधियां आयोजित की गईं।
सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 28 जून को 'मन की बात' की 135वीं कड़ी में वर्षा जल की हर बूंद को बचाने के आह्वान के बाद अभियान में तेजी आई है। इसके तहत व्यापक जन जागरूकता के साथ जल संरक्षण संबंधी ढांचागत कार्यों को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अभियान में शिक्षण संस्थानों की भी सक्रिय भागीदारी रही और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा तकनीकी सत्रों के माध्यम से भूजल विज्ञान, जल विज्ञान प्रक्रियाओं और वर्षा जल संचयन प्रणालियों की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने समुदायों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ा सकें।
राज्य में निर्मित 905 संरचनाओं में 849 छत आधारित वर्षा जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं, जिनमें 21 सरकारी और 828 निजी भवनों में स्थापित की गई हैं। इसके अलावा भूजल पुनर्भरण के लिए 56 रिचार्ज शाफ्ट बनाए गए हैं। गंजम में सबसे अधिक 330, खोरदा में 121, मयूरभंज में 94, कटक में 62, संबलपुर में 54 और सुंदरगढ़ में 53 वर्षा जल संचयन संरचनाएं स्थापित की गई हैं। वहीं जाजपुर में 45, केंद्रपाड़ा में 10 तथा सुंदरगढ़ में एक भूजल पुनर्भरण शाफ्ट का निर्माण किया गया है।
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