भुवनेश्वर , अप्रैल 10 -- सहकारिता और नागरिक आपूर्ति अधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण ओडिशा के गंजम जिले के 3,000 से अधिक असली किसान मौजूदा खरीद सीजन के दौरान अपना धान बेचने से वंचित रह गए हैं।
रिपोर्टाें के अनुसार, इस साल जिले में धान खरीद के लिए लगभग 1.56 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से करीब 1.52 लाख किसान अपनी उपज बेच सके। हालांकि, पंजीकरण में गड़बड़ी और प्रशासनिक खामियों के चलते 3,000 से अधिक किसानों को खरीद टोकन नहीं मिल पाए।
किसानों ने आरोप लगाया कि धान की कटाई आमतौर पर नवंबर तक पूरी हो जाती है, लेकिन दिसंबर में एक निजी एजेंसी के जल्दबाजी में किए गए सैटेलाइट सर्वे ने कई खेती वाली जमीनों को गलत तरीके से 'गैर-धान क्षेत्र' के रूप में चिह्नित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, जमीनी सत्यापन या परामर्श के बिना ही असली किसानों को टोकन देने से मना कर दिया गया।
मानक प्रक्रिया के अनुसार, जून-जुलाई के दौरान सोसायटियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किसान पंजीकरण किया जाता है। इसके बाद कृषि विस्तार कार्यकर्ता और राजस्व अधिकारी खेतों का भौतिक सत्यापन करते हैं और धान की खेती को प्रमाणित करते हैं। इस बहु-स्तरीय सत्यापन के बावजूद अधिकारियों ने कथित तौर पर निजी एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा किया, जिससे कई पात्र किसान इस प्रक्रिया से बाहर हो गये।
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