भुवनेश्वर , सितंबर 23 -- ओडिशा के गंजाम जिले में बंधुआ मजदूरी से मुक्त घोषित नाबालिग बालक को एक बार फिर बंधुआ मजदूरी के कथित जाल से मुक्त कराया गया है।
अधिकारियों ने मंगलवार शाम बालक को नियोक्ता के परिसर से मुक्त कराया। उसके माता-पिता का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना बालक को घर से जबरन ले जाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियोक्ता ने उन्हें धमकी दी और परिवार को कथित तौर पर दिये गये अग्रिम धन को वापस करने की मांग की।
बालक को फिलहाल एक आश्रय गृह में रखा गया है और उसे बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया जायेगा।
मामला उस समय सामने आया था जब शिकायत में आरोप लगाया गया कि चिकिटी प्रखंड के कलाबाड़ा गांव में बालक और एक अन्य नाबालिग से करीब दो वर्षों तक भैंस चराने का काम जबरन कराया जा रहा था। दोनों से अधिक काम कराया जाता था और उन्हें मजदूरी भी नहीं दी जाती थी।
राजस्व, श्रम, पुलिस और बाल संरक्षण अधिकारियों की संयुक्त टीम ने एक सितंबर को गांव में छापेमारी की थी, लेकिन दोनों बच्चे वहां नहीं मिले। बाद में बालक को अधिकारियों के समक्ष पेश किया गया और उसे बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया। इसके बाद बाल कल्याण समिति ने बालक की अपने माता-पिता के साथ रहने की इच्छा को देखते हुए उसे उनके सुपुर्द कर दिया था। समिति ने परिवार को ओपन स्कूलिंग के माध्यम से उसकी शिक्षा जारी रखने की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया था।
गत 10 सितंबर को बरहामपुर के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ने बालक को औपचारिक रूप से मुक्त बंधुआ मजदूर घोषित करते हुए रिलीज सर्टिफिकेट जारी किया था। इसके साथ ही वह पुनर्वास संबंधी उपायों के लिए पात्र हो गया था।
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